चीनी 42 पर
जोधपुर. रोजमर्रा की जरूरत वाली चीजों, खासकर खाद्य पदार्थो की कीमतों के दिनोदिन बढ़ते भावों ने आम आदमी का परिवार चलाना मुश्किल कर दिया है। पिछले एक माह में चीनी के भाव 8 रुपए उछल कर 42 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गए हैं।
दालें भी पीछे नहीं हैं। इनमें प्रतिकिलो में पांच से दस रुपए की बढ़ोतरी हो गई है। इन दिनों सावों का सीजन होने से मांग बढ़ने तथा तुलनात्मक रूप से जिंसों की आवक में कमी से भाव बढ़ते जा रहे हैं।
किराणा व्यापारियों की मानें तो सावों की सीजन तो चल रही है लेकिन सर्दी में नए गुड़ की मांग बढ़ने के कारण किसान गन्ने की उपज का ज्यादा हिस्सा गुड़ उत्पादकों को देने लगे हैं। इससे चीनी का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर चीनी पर पड़ रहा है। कई खाद्य वस्तुएं ऐसी हैं जिनके भाव एक माह पहले की तुलना में प्रति किलो आठ से पंद्रह रुपए बढ़ गए हैं।
इससे आम आदमी की हालत पतली होने लगी है। दालों में लोगों की पहली पंसद तूअर की दाल 84 रुपए प्रतिकिलो बिक रही है तो चने की दाल 30 रुपए प्रतिकिलो मिल रही है। चीनी, चाय, चावल और देशी घी के भावों में निरंतर बढ़ोतरी से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है।
मिलों में उत्पादन घटने से असर
चीनी—गुड़ के होलसेल व्यापारी अशोक गर्ग का कहना है कि देश में चीनी की प्रति वर्ष 230 लाख टन की खपत है। पिछले वर्ष चीनी का उत्पादन मात्र 148 लाख टन हुआ है। इस वर्ष भी स्थिति ठीक नहीं है। गुड़ की सीजन शुरू हो चुकी है, गुड़ उत्पादक किसानों को गन्ने का नकद भुगतान करते हैं।
दूसरी ओर चीनी मिल वाले उधारी में गन्ना खरीदते हैं। ऐसे में किसान भी मिलों को माल देने के प्रति उत्साहित नजर नहीं आते। इन हालात में चीनी मिलों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है जिसका असर कीमतों पर भी पड़ रहा है। छह माह पहले तक चीनी 18 से 20 रुपए किलो तक मिल रही थी, वही अब 40 से 42 रुपए किलो हो गई है।










