मेट्रो रूट में कोई बदलाव नहीं
जयपुर. जयपुर में चलने वाली मेट्रो का प्रोजेक्ट एक माह आगे खिसक गया है। इस परियोजना का काम अब अगले साल अप्रैल की बजाय मई तक ही शुरू हो पाएगा। मेट्रो रेल के रूट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। एम.आई.रोड पर मेट्रो को भूमिगत ही चलाया जाएगा। इसके साथ ही अजमेरी गेट से ट्रांसपोर्ट नगर तक विस्तार मार्ग के लिए भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
मेट्रोमैन ई. श्रीधरन ने जयपुर में विभिन्न स्थलों का दौरा करने के बाद शाम को हुई मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को यह संकेत दिए। श्रीधरन ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को तैयार करने में कुछ समय लग रहा है।
इसका कारण यह है कि इसके लिए यात्रीभार को लेकर नए सिरे से कुछ कवायद चल रही है। संभवतया अगले साल मई माह से इस परियोजना पर व्यावहारिक रूप से काम शुरू हो जाएगा। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान मुख्य सचिव टी. श्रीनिवासन, प्रमुख वित्त सचिव सी.के. मैथ्यू, नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधू, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्रीमत पांडेय भी मौजूद थे।
एम.आई. रोड पर भूमिगत ही चलेगी मेट्रो : जयपुर में एम.आई. रोड पर मेट्रो को भूमिगत ही चलाया जाएगा। हालांकि इस पर सरकार को 800 से 1000 करोड़ रुपए ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। वैकल्पिक रूप में अशोक मार्ग से मेट्रो को ले जाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा था। एम.आई. रोड के हेरिटेज स्वरूप और लागत को देखते हुए इसका मार्ग बदलने पर विचार किया जा रहा था।
कलेक्ट्रेट व कोर्ट का जुड़ना संभव नहीं : बनीपार्क में न्यू कोर्ट और कलेक्ट्रेट को मेट्रो से जोड़ने के लिए श्रीधरन ने इन स्थानों का भी दौरा किया। उन्होंने बताया कि यहां से मेट्रो को निकालना इसलिए व्यावहारिक नहीं होगा, क्योंकि इसमें घुमाव अधिक हैं। इसलिए इन स्थानों को शटल बस सेवा के माध्यम से मेट्रो के साथ जोड़ा जाएगा। सिंधी कैंप के पीछे मेट्रो को स्काउट्स गाइड के कार्यालय, बनीपार्क धर्मार्थ संस्थान, महारानी स्कूल होते हुए धर्मसिंह सर्किल होकर झोटवाड़ा रोड पर ले जाने की योजना है।
ट्रांसपोर्ट नगर की योजना भी बनेगी
भविष्य में मेट्रो के विस्तार की संभावना को ध्यान में रखते हुए श्रीधरन ने गुरुवार को ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र का भी दौरा किया। उन्होंने कहा कि इस मार्ग की परियोजना बनाने का काम अभी से शुरू कर दिया जाएगा, लेकिन काम बाद में शुरू किया जाएगा।
समरी रिपोर्ट पर बनेगा टेंडर डॉक्यूमेंट
नगरीय विकास विभाग के अनुसार श्रीधरन ने डीएमआरसी की समरी रिपोर्ट के आधार पर ही टेंडर डॉक्यूमेंट बनाने की सहमति दे दी है। टेंडर में इस प्रोजेक्ट के लिए एक पैकेज बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री गहलोत से श्रीधरन की मुलाकात के बाद नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधू ने बताया कि मेट्रो को दिल्ली की तर्ज पर केन्द्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से चलाएंगे। इसके लिए अलग से जेएमआरसी कंपनी का गठन किया गया है।
अगले साल पड़ेगी पैसे की जरूरत
संधू ने बताया कि मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए इस साल पैसे की ज्यादा जरूरत नहीं होगी, लेकिन अगले साल करीब 250 से 300 करोड़ रुपए की जरूरत होगी। इतनी राशि राज्य सरकार अपने पास से उपलब्ध कराएगी। इस बीच किसी न किसी वित्तीय संस्था से ऋण की बात कर ली जाएगी।
मेट्रो को बनाने वाली कंपनी का फैसला बाद में
मेट्रो प्रोजेक्ट को कौनसी कंपनी बनाएगी। इस बारे में अभी अंतिम तौर पर कोई फैसला नहीं किया गया है। सरकार का मानस यह है कि इस प्रोजेक्ट में डीएमआरसी को तो साथ रखना ही पड़ेगा। चाहे वह सलाहकार के रूप में रहे या काम करने वाली कंपनी के रूप में, इसलिए बेहतर यही रहेगा कि डीएमआरसी ही इस प्रोजेक्ट को करे।










