Friday, Nov 20th, 2009, 4:53 am [IST]  

danik bhaskar‘निर्णय लेने से पहले इंतजार तो करते’

भास्कर न्यूज

इंदौर. मैं यहां कुछ कहने नहीं बल्कि यह पूछने आया हूं कि आखिर मुझे क्या करना है.. जो कुछ हुआ उसका मुझे आपसे ज्यादा अफसोस है। आप कोई निर्णय लेने के पहले एक दिन तो मेरा इंतजार करते.. इंदौर में बैंच व बार के रिश्ते हमेशा बहुत मधुर रहे हैं.. इसकी मिसाल दूसरी बैंच में दी जाती रही है.. जो कुछ हुआ उसका जस्टिस सप्रे को भी दुख है.. मेरा सुझाव है कि आप लोग अपने निर्णय पर नए सिरे से विचार करें।



यह हैं गुरुवार सुबह हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कक्ष में प्रदेश के कार्यवाहक चीफ जस्टिस रमेश गर्ग व बार के सदस्यों के बीच हुए संवाद के कुछ अंश। लंबे समय तक इसी बार के सदस्य रहे जस्टिस गर्ग आज कुछ अलग भूमिका में नजर आए। इस भूमिका में वे पहली बार एसो. सदस्यों के बीच थे और उन्होंने दिल खोलकर अपनी बात कही।



वे यहां दो दिन पहले जस्टिस अभय मनोहर सप्रे व अभिभाषक एसएन शर्मा के बीच हुए विवाद के बाद बार एसो. द्वारा जस्टिस सप्रे की कोर्ट में पैरवी के लिए उपस्थित न होने के फैसले के बाद उत्पन्न स्थिति पर आगे होकर चर्चा के लिए पहुंचे। उनका मूल मकसद इस विवाद का पटाक्षेप करना था और वे काफी हद तक इसमें कामयाब भी रहे।



करीब एक घंटे के इस सीधे संवाद में जस्टिस गर्ग के अलावा वरिष्ठ अभिभाषक बीएल पावेचा, सत्येंद्र व्यास, अनवर खान व दिलीप क्षीरसागर ने अपनी-अपनी बात कही। उन्होंने सदस्यों के कुछ मुद्दों से सहमति भी दिखाई तो कुछ पर असहमत भी रहे। संवाद की शुरुआत हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष पी.के. शुक्ला ने यह कहते हुए की कि चीफ जस्टिस खुद हमारे बीच आए हैं। वे हमारे परिवार के वरिष्ठ सदस्य भी हैं।



इतना कहने के बाद उन्होंने बार के सदस्यों के अलावा बाकी लोगों से कक्ष से बाहर चले जाने का अनुरोध किया। इसके बाद जस्टिस गर्ग ने अपनी बात कही। उन्होंने बैंच व बार के मधुर संबंधों के कई उदाहरण दिए। सदस्यों से अपने संबंधों व कुछ पुरानी बातों का जिक्र करते हुए वे बोले आपको ऐसा करने की जरूरत क्यों पड़ी यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है। जैसे ही मुझे घटना की जानकारी मिली मैंने आपके अध्यक्ष से कहा मैं आपके बीच आ रहा हूं वहीं बैठकर इसका निदान कर लेंगे।



जस्टिस गर्ग के संबोधन के बाद वरिष्ठ अभिभाषक बी.एल. पावेचा बोले। उन्होंने कहा हम जो कर रहे हैं वह विधि सम्मत नहीं है, अवैध है और सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध है। हमें इस निर्णय को वापस लेकर तुरंत काम पर लौटना चाहिए। दिलीप क्षीरसागर व अनवर खान के स्वर भी इससे मिलते-जुलते थे। श्री व्यास का संबोधन इससे हटकर रहा।



उन्होंने कहा यह घटना तो एक उदाहरण मात्र है, ऐसी घटनाएं कई बार होती हैं। वे अपने वरिष्ठ साथियों को भी आड़े हाथों लेने से नहीं चूके। उनकी नाराजगी वरिष्ठ वकीलों के साथ जजों द्वारा किए जा रहे व्यवहार को लेकर भी थी। श्री व्यास के संबोधन के दौरान जब तालियां बजी तो उन्होंने कहा मैं यहां भाषण नहीं दे रहा हूं बल्कि आप सबकी पीड़ा बता रहा हूं। उनके स्वर बहुत तीखे थे।



उनका कहना था सालों पहले बैंच हमारे लिए मार्गदर्शक की भूमिका अदा करती थी लेकिन अब स्थिति ऐसी नहीं है। जैसे ही श्री व्यास का भाषण खत्म हुआ जस्टिस गर्ग फिर बोले। उन्होंने भाषण के कुछ अंशों पर आपत्ति ली और कहा आज यह बात करने का कोई औचित्य नहीं है। यदि आप जजों के स्तर की बात कर रहे हैं तो वकीलों के स्तर की भी बात करें। गिरावट दोनों ही तरफ से होगी।



जस्टिस गर्ग की इस पहल पर श्री शुक्ला ने कहा यह हमारे लिए बहुत भावुक क्षण है। श्री गर्ग हमारे परिवार के वरिष्ठ सदस्य हैं। उन्होंने जब मर्यादा पुरुषोत्तम राम से जुड़ा एक उदाहरण सामने रखते हुए बार के निर्णय को सही ठहराना चाहा तो जस्टिस गर्ग ने कहा इस घटना को उससे मत जोड़िए। इसके बाद करीब 10 मिनट तक संवाद और चला और चीफ जस्टिस फैसला लेने की बात बार पर छोड़कर वहां से चले गए।



आज फिर होगी हाईकोर्ट बार की विशेष साधारण सभा



हाईकोर्ट बार की विशेष साधारण सभा शुक्रवार दोपहर एक बजे आहूत की गई है। इस बैठक में जस्टिस अभय मनोहर सप्रे के सामने पैरवी नहीं करने के बार के फैसले पर पुनर्विचार के लिए कुछ सदस्यों द्वारा दिए गए पत्र पर पुनर्विचार होगा। गुरुवार सुबह चीफ जस्टिस रमेश गर्ग के बार सदस्यों से संवाद के बाद कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने बुधवार की विशेष साधारण सभा में लिए गए निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया।



कार्यकारिणी की बैठक में इस पत्र तथा चीफ जस्टिस के आग्रह पर विचार-विमर्श हुआ। फैसला लिया गया कि चूंकि यह निर्णय विशेष साधारण सभा में लिया गया था इसलिए इस पर पुनर्विचार भी उसी के द्वारा किया जाए। इसी के बाद तय हुआ की शुक्रवार को दोपहर 1 बजे विशेष साधारण सभा आहूत की जाए।

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
select your language:     Hindi Roman     Hindi Phonetic     English
comment:
code: