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Friday, Nov 20th, 2009, 6:11 am [IST]  

danik bhaskarलाखों की मशीनरी जंग के हवाले

अमित ऋषि

अमृतसर. सिविल अस्पताल में ब्लड बैंक जब बनेगा, तब बनेगा, फिलहाल इसके लिए आई लाखों रुपए की मशीनरी अस्पताल में पड़ी जंग खा रही है। बैंक चालू होने का लाइसेंस कब मिलेगा, यह कोई नहीं जानता। पिछले एक साल से इसका प्रयास चल रहा है, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ऐसे में लाखों की मशीनरी बैंक खुलने के छह माह पहले ही मंगवाने पर प्रश्न उठने लगे हैं।



ब्लड बैंक शुरू न होने का सबसे बड़ा कारण स्टाफ की कमी माना जा रहा है। यही नहीं अस्पताल के पास ब्लड ट्रांसफ्यूजन अधिकारी भी नहीं है और विभाग आधुनिक ब्लड बैंक का सपना संजोये बैठा है। सूत्रों के मुताबिक ब्लड बैंक के लिए करीब 15 लाख की ब्लड सैपरेटर मशीन, 25 लाख की ए-फेरसिज मशीन, करीब 15 लाख के डीप फ्रीजर पहुंच चुके हैं।



हालांकि नियमानुसार यह सामान फिट होने के बाद ही ब्लड बैंक की मंजूरी मिलती है, लेकिन इस ओर कोई प्रयास नहीं हो रहा। सरकार, सेहत विभाग और अस्पताल प्रशसान की ढिलमुल नीति के कारण यह सारी मशीनरी कंडम होने की कगार पर है। हालत यही रही तो बैंक खुलने तक इन मशीनों की वारंटी भी खत्म हो जाएगी।



सूत्रों के अनुसार ब्लड बैंक में देरी का सबसे बड़ा कारण स्टाफ की कमी है। सबसे पहली जरूरत ब्लड ट्रांसफ्यूजन अधिकारी की है, लेकिन यह उपलब्ध नहीं है। अस्पताल के पास एक स्थाई पैथालोजिस्ट है। दो अन्य डैपुटेशन पर हैं। यही नहीं बैंक के लिए बीटीओ भी नहीं है। बीटीओ के लिए पैथालोजिस्ट के पास ब्लड बैंक में काम करने का तजुर्बा होना चाहिए।



इसके लिए कम से कम तीन लैब टैक्नीशियन भी चाहिएं। विभाग अस्पताल की स्टाफ नर्स से ही ब्लड बैंक का काम चलाने की सोच रहा है। नियमानुसार इसके लिए 2000 स्कवेयर फुट जगह चाहिए, जो उपलब्ध नहीं है। इसके विपरीत जीएनडीएच के ब्लड बैंक पर नजर डाली जाए तो सिविल अस्पताल का ब्लड बैंक कही नहीं ठहरता।



यहां एक बीटीओ, छह डाक्टर, पांच लैब टैक्नीशियन, तीन स्टाफ नर्स और उचित जगह भी है। अब ऐसे में यह बात समझ में नहीं आती कि जिस ब्लड बैंक के लिए लाखों का सामान मंगवाया जा चुका है, वह स्टाफ के अभाव में कैसे शुरू हो पाएगा।



जगह की भी कमी



नियमानुसार ब्लड बैंक के लिए 2000 स्कवेयर फुट जगह चाहिए, जो उपलब्ध नहीं है। इसके विपरीत जीएनडीएच के ब्लड बैंक पर नजर डाली जाए तो सिविल अस्पताल का ब्लड बैंक कही नहीं ठहरता। यहां एक बीटीओ, छह डाक्टर, पांच लैब टैक्नीशियन, तीन स्टाफ नर्स और उचित जगह भी है।



लाइसैंस के लिए लिखा गया है और कई बार रिमाइंडर भी भेजा गया है। बैंक को जल्द शुरू करा दिया जाएगा। स्टाफ की भर्ती सरकार ने करनी है। - डा. लहंबर सिंह, सिविल सर्जन

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