Friday, Nov 20th, 2009, 7:06 am [IST]  

danik bhaskarएसएमएस के जरिए जागरूकता अभियान

धनंजय कुमार

नई दिल्ली. उत्तर रेलवे दिन-ब-दिन अपने आपको हाईटेक करती जा रही है। सफर के दौरान शिकायत दर्ज करवाने के लिए एसएमएस सेवा शुरू करने के बाद अब वह लोगों को जागरूक करने के लिए भी एमएसएस सेवा शुरू करने की योजना बना रही है। एसएमएस के माध्यम से लोगों को मानवरहित फाटकों को पार करने का सही तरीका सिखाया जाएगा। मानव रहित रेलवे क्रॉसिंगों पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।



उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अनंत स्वरूप ने बताया कि उत्तर रेलवे के तहत करीब दो हजार मानव रहित फाटक हैं। फाटकों के आसपास काफी संख्या में गांव बसे हैं। फाटकों को पार करने के दौरान गांव वाले सावधानी नहीं बरते हैं, जिसके चलते दुर्घटनाएं हो जाती हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए नुक्कड़ नाटक, रेडियो, टेलीविजन आदि कई माध्यमों का प्रयोग पहले से ही किया जा रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षो में दूरसंचार के क्षेत्र में क्रांति आई है। आज अधिकांश लोग मोबाइल फोन का प्रयोग करते हैं। ऐसे में एसएमएस के जरिए लोगों तक पहुंचना सबसे आसान है।



कैसे काम करेगी यह योजना : उन्होंने बताया कि अगले तीन महीने तक पायलट प्रोजक्ट के तहत यह सेवा शरू की जाएगी। इसके तहत दो करोड़ एसएमएस भेजने की योजना है। एसएमएस प्रतिदिन तय समय पर भेजा जाएगा। एसएमएस हिन्दी भषा में भेजा जाएगा क्योंकि गांवों में रहने वाले अंग्रेजी के अच्छे जानकार नहीं होते हैं। गुरुमुखी भाषा में भी यह सेवा शुरू करने की तैयारी चल रही है, लेकिन इस पर अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।



तीन महीने के बाद पूरे प्रोजक्ट का आकलन किया जाएगा। अगर सफल रहा तो इसका और विस्तार किया जाएगा। स्वरूप ने बताया कि नियत समय पर एसएमएस भेजने के पीछे भी एक लक्ष्य है। शुरुआत में लोग एसएमएस को नजरअंदाज कर सकते हैं, लेकिन जब लगातार एक ही समय पर एसएमएस मिलेगा तो हमें उम्मीद है कि वे इसे पढ़ेंगे। उन्होंने बताया कि चूंकि किसानों की दिनचर्या सुबह 7 बजे के आसपास शुरू हो जाती है, इसलिए एसएमएस 7 बजे के भेजा जाएगा।



कितना आएगा खर्च



उन्होंने बताया कि शुरुआत में बीएसएनएल से संपर्क किया गया था। बीएसएनएल ने प्रति एसएमएस दो पैसे की मांग की थी। इसके अलावा एसएमएस भेजने के लिए मानव संसाधन मुहैया कराने की भी मांग की थी। उन्होंने बताया कि सर्वे कराने से जानकारी मिली कि बीएसएनएल के अलावा कई अन्य निजी कंपनियां भी इस काम को अंजाम देने के लिए उत्सुक हैं। ऐसे में निजी एजेंसी को एसएमएस भेजने की जिम्मेदारी दी गई है। एजेंसी प्रति एसएमएस साढ़े तीन पैसे चार्ज कर रही है।

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