पीएससी 2008 के आयु संबंधी मामले डिविजन बेंच को
बिलासपुर. पीएससी 2008 की परीक्षा में आयुसीमा छूट के लिए दायर याचिकाओं की सुनवाई अब डिविजन बेंच में होगी। चीफ जस्टिस राजीव गुप्ता के निर्देश पर ये प्रकरण जस्टिस धीरेंद्र मिश्रा व आरएन चंद्राकर की डिविजन बेंच को रिफर किए गए हैं, जहां शुक्रवार को इनकी सुनवाई होने की संभावना है।
हेमानंद मणि त्रिपाठी व 8 अन्य परीक्षार्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पीएससी की परीक्षा में शासन के आयुसीमा में छूट संबंधी नियम को चुनौती दी है। इन परीक्षार्थियों ने वर्ष 2008 में पीएससी की प्रारंभिक परीक्षा दी और पास भी हुए। छत्तीसगढ़ से बाहर के प्रदेशों से होने के आधार पर उन्हें आयु सीमा में छूट न देते हुए मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई।
प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर जो याचिकाएं दायर हुईं, उनमें इन परीक्षार्थियों की याचिकाओं को भी शामिल किया गया और मुख्य परीक्षा को स्थगित रखा गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकीलों ने तर्क दिया कि जब आवेदन जमा किए जा रहे थे, ऐसे किसी नियम की जानकारी नहीं दी गई थी।
बाद में इसे लागू किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के निवासियों की तरह दूसरे प्रदेश के प्रत्याशियों को भी आयुसीमा में छूट दी जाए। इन मामलों की पिछली सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने नियम को चुनौती दी है इसलिए इन प्रकरणों की सुनवाई डिविजन बेंच में होनी चाहिए। कोर्ट ने आदेश किया है कि ये मामले चीफ जस्टिस के समक्ष प्रस्तुत किए। उन्होंने मामलों को डिविजन बेंच में सुनवाई के लिए भेजा है।










