Friday, Nov 20th, 2009, 7:34 am [IST]  

danik bhaskarरेल हादसों के लिए जिम्मेदार लालू, ममता नहीं

शिशिर सोनी

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी रेल मंत्रालय की संसदीय समिति के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ माकपा नेता बासुदेव आचार्य लगातार हो रहे रेल हादसों के लिए तृणमूल सुप्रीमो रेलमंत्री ममता बनर्जी को दोषी नहीं मानते।



संसद परिसर में भास्कर से बातचीत में लोकसभा में माकपा संसदीय दल के नेता आचार्य ने साफ कहा कि बतौर रेलमंत्री लालू प्रसाद के समय हुई गैर-वाजिब ओवरलोडिंग का असर अब पटरियों पर दिखने लगा है। उन्होंने बताया कि स्थायी समिति के मंच से हमने माल लदान और यात्री गाड़ियों की बोगियों को बढ़ाने का जमकर विरोध किया था, लेकिन तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने चोरी-चुपके ज्यादा माल लदान को कानूनी जामा पहना कर हमारी बात अनसुनी कर दी थी। अब उसका असर पर दिखने लगा है।



ममता को सलाह देते हुए वरिष्ठ माकपा नेता ने कहा,‘अब समय आ गया है जब रेलमंत्री को वर्षो से धूल फांक रहे सदस्य सिग्नल की फाइल पर से धूल हटाकर रेलवे बोर्ड में नया पद सृजित कर देना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ज्यादातर हादसे सिग्नल सिस्टम में खराबी के कारण होते हैं। रेलवे बोर्ड में इस तकनीकी काम पर सजग रहने वाला फुलटाइम अधिकारी के लिए नीतीश कुमार के समय संस्तुति की गई थी, लेकिन लालू इसे टालते रहे।



एक प्रश्न के जवाब में बासुदेव आचार्य ने कहा, ‘सात हजार करोड़ रुपए सलाना की खरीद करने वाले स्टोर विभाग का भी एक प्रतिनिधि रेलवे बोर्ड में होना चाहिए। इससे स्क्रैप में हो रही धांधली और भ्रष्टाचार पर एक हद तक अंकुश पाया जा सकेगा।’



तीन दशक से ज्यादा समय तक रेलवे की तकरीबन हर उच्चस्तरीय कमेटी का नेतृत्व कर चुके बासुदेव आचार्य ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘देश की रेलमंत्री अगर कोलकाता में रहकर काम करे तो लोग उसे बंगाल की रेलमंत्री ही समझेंगे। अच्छा हो कि रेलमंत्री रेलवे बोर्ड में समय दें। दुर्घटनाएं न हों इसके लिए रणनीति बनाएं।



यात्रियों की सुख सुविधा का खयाल रखें।’ आचार्य ने कटाक्ष करते हुए कहा, रेल और रेल यात्रियों की बेहतरी की बजाय ममता पश्चिम बंगाल की पुरानी रेल परियोजनाओं का नाम बदल कर उद्घाटन, शिलान्यास करने में व्यस्त हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वर्षो पुराने जुबली पुल का उद्घाटन सुपर-स्ट्रक्चर के नाम पर कर दिया। प्रथम संग्राम सेनानी एक्सप्रेस का नाम बदलकर सिपाही एक्सप्रेस कर हरी झंडी दिखा दी। बंकिम चंद चट्टोपाध्याय जैसे ऐतिहासिक पुरु ष के नाम पर बने पुल का नाम संघति सेतु कर फीता काट दिया।



रेलमंत्री को घेरते हुए घाघ राजनीतिक आचार्य ने कहा, ‘दक्षिण, दक्षिण मध्य, पूर्व मध्य रेलवे सहित सीएलडब्लू और डीएलडब्लू जैसे संस्थानों में महाप्रबंधकों का पद महीनों से रिक्त पड़ा है। दो दिनों के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक भी सेवानिवृत्त होने वाले हैं। रेलमंत्री को ऐसे पदों पर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती तत्काल सुनिश्चित करनी चाहिए। टीम लीडर न होने से काम कहीं न कहीं प्रभावित होता है। ये सब तभी हो सकता है जब रेलवे बोर्ड में रेलमंत्री सौ फीसदी समय देंगी।’

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