समस्याओं की राजधानी में अपनी हो महापौरौ
सागर. सागर शहर समस्याओं की राजधानी है। इसलिए इस शहर को ऐसी महापौर की जरूरत है, जो अपनी हो। समस्याओं की राजधानी से इस शहर को मुक्त कराकर प्रदेश की राजधानी का बनाने का प्रयास कर सके। शहर के प्रमुख मुद्दों को प्रमुखता से लेकर कार्य करा सके। शहर में एक नहीं कई मुद्दे हैं।
इतना बड़ा नगर निगम होते हुए भी शहर के हर कोने में गदंगी है। हमारी महापौर को शहर के ही दूसरे हिस्से में स्थित छावनी की सड़कों, सौंदर्यीकरण, पार्र्को आदि को देखकर प्रेरणा लेनी चाहिए कि वहां नगर निगम की अपेक्षा सड़कें अच्छी क्यों बनती हैं?
शहर के लोग छावनी के पार्र्को में जाना क्यों पसंद करते हैं? कुर्सी और कार में बैठकर शहर के विकास का सपना तो देखा जा सकता है, लेकिन सपना तभी पूरा हो सकता है जब महापौर सड़कों पर आकर शहर के हालात से रूबरू हो। लोगों की समस्याओं को सुने और हल कराए।
अभी तक जो महापौर बने, उन्होंने क्या किया? सबके सामने है। अब जरूरत है ऐसी मिशाल पेश करने की, जिसे कोई भी देखकर कहे- देखो हमारी महापौर जा रही हैं। यानी महापौर जो भी महिला बने, वह कुर्सी और कार में बैठकर जनता को न भूल जाए। जैसे वह घर की सुविधाओं को देखती हैं, वैसे ही शहर की सस्याओं को देखे।
प्रत्यक्ष जनसंपर्क करे। जनता भी वोट देने से पहले से यह पूछे कि आप कितनी बार हमारे मोहल्ले में आएंगी। होता यह है कि वोट लेने के बाद ज्यादातर का चेहरा देखने के लिए भी जनता तरस जाती है। यह आम बात हो चुकी है कि महापौर जो भी पढ़ा-लिखा हो।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या पढ़े-लिखे भ्रष्ट नहीं होते? आज हमारा शहर पिछड़ा क्यों हैं? यह सोचना चाहिए। सागर में रहने वालों को सागर अच्छा लगता है, लेकिन जब वह सड़कों पर फैली गदंगी, बाजार में अतिक्रमण, बोझिल यातायात, दर्ु्गध देती झील, अस्त-व्यस्त कॉलोनियां देखते हैं तो सोचते हैं कि इतना बड़ा नगर निगम होते हुए भी इतनी सस्याएं क्यों हैं?
अब जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा। अपने घर से निकाले कचरे को दूसरे के घर के सामने फेंकने की आदत बदलना होगी। यह अपेक्षाएं और विचार यहां टॉक-शो में आए वक्ताओं के थे। इन्होंने शहर के मुद्दों को लेकर न सिर्फ अपने विचार रखे बल्कि सुझाव भी दिए।
दैनिक भास्कर के सिविल लाइंस स्थित स्थानीय कार्यालय में गुरुवार को टॉक-शो का तीसरा आयोजन हुआ। हमारी महापौर कैसी हो? प्राथमिकता क्या हो? शहर के मुद्दे क्या हैं? विषय पर वक्ताओं ने खुलकर अपने विचार रखे। प्रस्तुत है प्रबुद्ध लोगों के सारगर्भित विचार।










