नेत्रहीन 70 किमी पैदल चलकर कलेक्टोरेट पहुंचा
रायगढ़. आर्थिक तंगी के चलते रामदयाल जो कि नेत्रहीन है ने जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी की दूरी तय करते हुए बुधवार को कलेक्टोरेट पहुंचा है। जहां कलेक्टर श्री त्यागी से मुलाकात नहीं होने पर भूखा-प्यासा अपनी 6 साल की बच्ची के साथ स्टेशन परिसर में रात गुजारा।
अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए रामदयाल ने बताया कि शासन की ओर से प्रतिमाह निराश्रित पेंशन राशि 200 रुपए प्राप्त होती है। कमाई का कोई जरिया नहीं होने से इतनी कम राशि से वह अपने परिवार भरण-पोषण नहीं कर पा रहा है।
साथ ही साथ रहने के लिए मकान भी नहीं है। यही नहीं रामदयाल ने गांव के सरपंच द्वारा हस्ताक्षर युक्त जाति, निवास व विकलांगता प्रमाण पत्र अपने साथ लाया हुआ है और इसी आस में कलेक्टोरेट परिसर में बैठा हुआ है कि जिलाधीश उसकी गुहार को सुने और गरीब अंधे के रहने के लिए इंदिरा आवास बनाने में सहयोग प्रदान करें।
गरीबी की बोझ लिए एक अंधा व्यक्ति पिछले दो दिनों से कलेक्टोरेट परिसर में डेरा जमाए बैठा हुआ है। जहां उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। विदित हो कि खरसिया ब्लाक के केवाली निवासी रामदयाल दोनों आंख से अंधा है। जिसके छोटे-छोटे चार बच्चे भी हैं।
जिसके पास न तो रहने के लिए मकान है और न ही खाने के लिए दो वक्त की रोटी भी मुनासिब हो पा रही है। ऐसे में यह अंधा व्यक्ति गरीबी की बोझ लेकर कलेक्टर श्री त्यागी के पास बुधवार से आस लेकर पहुंचा है। जहां जिलाधीश के शहर में नहीं होने पर बिना खाए-पिए उनकी राह ताक रहा है। यही नहीं स्टेशन परिसर में ठंड से ठिठूरते हुए रात भी गुजारी है।











