ये मास्क नहीं हैं सुरक्षित
रोहतक. स्वाइन फ्लू के माहौल के बीच मेडिकल बाजार में ऐसे मास्क का धंधा चमक उठा है, जो स्वाइन फ्लू के वायरस को रोक ही नहीं सकता। एन 95 मास्क महंगा होने के कारण असली मास्क बाजार में नहीं है बल्कि स्वाइन फ्लू के वायरस से बचाव के लिए कफ और कोल्ड के वायरस को रोकने वाले मास्क बिक रहे हैं। उधर, पीजीआई, सिविल अस्पताल में भी कुछ ऐसी ही तस्वीर है। अधिकांश स्टाफ के पास एन 95 मास्क नहीं हैं।
स्वाइन फ्लू के वायरस बचाव के लिए एन 95 मास्क ही काम आता है। इसकी मूल कीमत काफी कम है, लेकिन ज्यादातर जगहों पर इसे भी तीन या चार गुना महंगा बेचा जा रहा है। स्वाइन फ्लू फैलने के बाद भले देश में मास्क की बिक्री 10 गुणा से ज्यादा जरूर बढ़ गई है, लेकिन स्वाइन फ्लू के वायरस से बचाव वाले एन 95 मास्क की बिक्री आमतौर पर स्थिर है। विशेषज्ञोंे का कहना है कि मेडिकल स्टोरों से लोग सर्जिकल मास्क या पेपर मास्क ही ज्यादा खरीद रहे हैं। कुछ लोग डबल लेयर या ट्रिपल लेयर मास्क भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
वरना फैल जाएगा संक्रमण
अगर स्वाइन फ्लू मरीज एन 95 मास्क नहीं पहनता है तो उससे अन्य लोगों के भी चपेट में आने की संभावना बन जाती है। इससे बचाव के लिए या तो एन 95 मास्क पहना चाहिए या फिर रूटिन में प्रयोग होने वाला मास्क डबल पहनना चाहिए।
माडल टाउन की छात्रा आई चपेट में
माडल टाउन की छात्रा अश्मि स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गई है। परिजनों ने पीजीआई में चैकअप कराया, जहां डाक्टरों ने उसकी बीमारी के लक्षणों को संदिग्ध मान लिया। उसके सैंपल लिए। पाजिटिव रिपोर्ट मिलने पर उसका इलाज शुरू हो गया है।
शक्षणिक टूर पर लगा प्रतिबंध
स्वाइन फ्लू का प्रभाव स्कूलों पर नजर आने लगा है। कुछ स्कूलों ने शैक्षणिक टूर लेकर जाने के लिए प्रतिबंध लगा दिया है, वहीं कुछ अन्य स्कूलों के प्राचार्र्यो ने भी सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। माडल स्कूल प्राचार्य सेवानिवृत्त कर्नल महेंद्र राठी के अनुसार स्वाइन फ्लू की बीमारी के मद्देनजर रखते हुए अनिश्चितकालीन के लिए स्कूल के टूर पर रोक लगाई गई है, क्योंकि इस बीमारी का विदेशों से आगमन हुआ है और पर्यटक केंद्रों पर विदेशी नागरिकों का तांता लगा रहता है। शहर के अन्य प्राइवेट व सरकारी स्कूलों ने भी टूर पर रोक लगाने की योजना बनाई है ताकि उनके बच्चे इस बीमारी की चपेट में न आ जाएं।
स्वाइन फ्लू को लेकर पीजीआई पूरी तरह अलर्ट है। हर स्टाफ मेंबर मास्क पहनकर इलाज करता है। दवाइयां भी पर्याप्त हैं। मास्क का प्रयोग स्थिति के अनुरूप किया जाता है।
डा. चांद सिंह ढुल निदेशक, पीजीआईएमएस










