वो चुनाव में, ये सेंक रहे रोटी
पाली. नगर परिषद चुनाव में बड़े पैमाने पर महिला प्रत्याशियों के चुनावी मैदान में उतरने के कारण घर=परिवार संभालने की जिम्मेदारी उनके पति समेत अन्य सदस्यों पर आ गई है। कई परिवारों में तो खाने=पीने का व्यवस्था पड़ौसियों के भरोसे चल रही है। कई जगह पर महिला प्रत्याशी अपने प्रचार में वार्ड की गलियों में घूमकर वोटों का जुगाड़ कर रही है और उनके पति बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर उनका टिफिन तैयार कर रहे है।
‘भास्कर’ ने इस बारे में कई वाडरे में जाकर देखा तो कई व्यक्ति अपनी पत्नी को जीताने के लिए मतदाताओं की पर्चियों के लिफाफे तैयार कर रहे हैं तो कई अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार करने में नजर आए। निकाय चुनाव में पहली बार महिला आरक्षण की व्यवस्था लागू होने के बाद हर दूसरे वार्ड से महिला उम्मीदवार वार्ड प्रमुख बनने के लिए भाग्य आजमा रही हैं।
सुबह से लेकर शाम तक चुनावी प्रचार व जनसंपर्क में व्यस्त रहने के कारण उनकी पारिवारिक दिनचर्या गड़बड़ा गई है। अधिकांश परिवारों में तो बच्चों की सार-संभाल से लेकर चुल्हा=चोका की जिम्मेदारी का निर्वहन उनके पति या फिर रिश्तेदारों को करनी पड़ रही है। पत्नी को सुबह उठाकर बच्चों तथा अपने लिए नाश्ता तैयार भी पति को खुद को ही करना पड़ रहा है।
दिनभर मतदाताओं की खातिरदारी का भी जिम्मा : कई वार्डो में महिला उम्मीदवारों के घर पर ही दफ्तर खोला गया है और घर आने वाले मतदाता तथा कार्यकर्ताओं की खातिरदारी का मोर्चा भी पतियों ने संभाल रखा है। घर पर आने वाले हर मतदाता की मनुहार की जा रही है। उनको चाय=नाश्ते के बगैर नहीं भेजने के निर्देश भी श्रीमती ने श्रीमान को दे रखे हैं।
बच्चों ने भी संभाली प्रचार की कमान
अपनी मम्मी या दीदी के चुनाव प्रचार की कमान परिवार के बच्चों ने भी संभाल रखी है। स्कूल से घर आते ही बच्चे अपने हाथों में दल का झंडा उठाकर प्रचार में जुट रहे हैं। इन बच्चों ने अपने कई सहपाठियों को भी प्रचार अभियान में शामिल कर रखा है।










