संवेदनशील स्टेशन होंगे कमांडो के हवाले
जालंधर. मुंबई बम कांड से सबक लेते हुए फिरोजपुर डिवीजन के 4 संवेदनशील स्टेशन जल्द कमांडो के हवाले होंगे। पांच स्टेशनों पर 160 मोर्चे लगेंगे। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने के लिए जीआरपी की नफरी को जल्द पूरा किया जाएगा। इसके लिए होमगार्ड और एसपीओ की भर्ती की जा रही है। जीआरपी आईजी परमजीत सिंह सराओ ने वीरवार को सिटी रेलवे स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
इस दौरान उन्होंने कुछ यात्रियों से भी बातचीत की। सराओ ने बताया कि जीआरपी में सुरक्षा यंत्र की कमी है, जिसकी पूर्ति के लिए प्रस्ताव उच्चधिकारियों को भेज चुके हैं। डिवीजन के जालंधर, अमृतसर, लुधियाना और पठानकोट रेलवे स्टेशन की सुरक्षा के लिए जीआरपी को 30 कमांडो मिल रहे हैं। इसके अलावा पांच स्टेशनों पर 160 मोर्चे लगाए गए हैं, जहां जीआरपी मुलाजिम तैनात होंगे।
जीआरपी में अधिकारियों को लेकर कुल नफरी 1500 है, जिसमें केवल 1100 मुलाजिम हैं। नफरी को कम करने के लिए 990 होमगार्ड और 40 एसपीओ की भर्ती की जा रही है। इसके बाद भी 120 पोस्ट खाली रहेंगी, जिन्हें भरने की योजना चल रही है।
स्टेशन पर स्कैनर की जरूरत: सुरक्षा पुख्ता करने के लिए स्टेशन पर स्कैनर लगने चाहिए, जिसके माध्यम से पता लगाया जा सके कि यात्रियों के बैग, पार्सल बंडल और डाकघर की चिट्ठी में क्या है। बिना किसी निरीक्षण पार्सल बंडल एसएलआर में लोड कर दिए जाते हैं। स्टेशन के चौतरफा दीवार खड़ी करनी चाहिए। ताकि कोई व्यक्ति मुख्य गेट के अलावा बाहर न निकल सके।
अमृतसर की तर्ज पर जालंधर रेलवे स्टेशन पर शव घर का निर्माण होगा। अमृतसर में धार्मिक संस्थाओं के सहयोग से एसी रूम का निर्माण किया जा चुका है, जिसमें रेलवे ट्रैक पर मरने वालों के शव को पहचान के लिए रखा जाता है। रेलवे ट्रैक पर मरने वालों के शव को जीआरपी थाना में लाने के लिए व्यवस्था नहीं है। जब इस संदर्भ में आईजी से पूछा गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली।
उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बजट का अभाव है, जबकि मूलभूत सुविधाओं के लिए आए वर्ष रेलवे बोर्ड की तरफ से बजट जारी होता है। जीआरपी एसएचओ के पास भी वाहन नहीं है। उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति की गाड़ी का सहारा लेना पड़ता है। स्टेशन निरीक्षण के दौरान डीएसपी जीआर.पी. नरिंदर पाल सिंह सिन्हा, एसएचओ गुरनाम सिंह मौजूद थे।










