गाजर की खेती से हो रही पो-बारह
खरखौदा. क्षेत्र में इन दिनों गाजर की खुदाई का काम शुरू हो गया है। जिससे भाव अधिक मिलने के कारण अगेत फसल की बिजाई करने वाले गाजर उत्पादक किसानों की चांदी हो रही है। बहुत से किसानों ने व्यापारियों को खेत में खड़ी हुई गाजर की फसल ही एक भाव तय कर बेच दी हैं। यही नहीं व्यापारी खुद गाजर की खरीद के लिए खेतों में घूम रहे हैं।
सबसे ज्यादा फायदा गाजर की अगेती खेती करने वाले किसानों को हुआ है। जिन किसानों की गाजर स्थानीय मंडी में पहुंच गई है उन्हें 500 से 600 रुपये प्रति 50 किलोग्राम के हिसाब से भाव मिल रहा है। जबकि बाहरी शहरों से आने वाली गाजरों का मूल्य 900 से 1200 रुपये प्रति 50 किलोग्राम के हिसाब से आ रही है। मांग बढ़ने के साथ साथ गाजर उत्पादक किसानों को मुनाफा मिल रहा है।
कस्बे की मंडी में खपत कम होने के कारण स्थानीय किसान अपनी गाजरों नरेला व दिल्ली स्थित आजादपुर मंडी में सप्लाई करने में लगे हुए हैं। गाजर उत्पादक किसान लक्ष्मण सिंह, लालचंद, जयसिंह, रामे का कहना है कि जैसे-जैसे ठंड बढ़ रही है वैसे मंडियों में गाजर की डिमांड भी अधिक बढ़ेगी जिससे किसानों को ज्यादा फायदा मिलेगा।
जो भी हो भाव ज्यादा मिलने से अगेती गाजर की खेती करने वाले किसानों की खुशी दोगुनी हो गई है। किसानों का कहना है कि गाजर की अगेती फसल मंडी में पहुंचाए जाने के बाद किसान अपने खेतों में गेहूं की बिजाई भी कर सकेंगे।
मंडी आढ़ती प्रधान विरेंद्र सिंह उर्फ वीरु का कहना है कि गाजर की आवक कम होने व मांग बढ़ने के कारण मूल्यों में काफी तेजी है। जैसे जैसे आवक बढ़ेगी मूल्यों में भी गिरावट आ जाएगी। फिलहाल दिल्ली की मंडियों से भी गाजर यहां पर पहुंच रही है।










