शहर सप्तरंगी आभा से गुलजार
कुरुक्षेत्र. कुरुक्षेत्र उत्सव में लगे राष्ट्रीय शिल्प मेले ने अपनी चमक बिखरेनी शुरू कर दी है। गुरुवार को शिल्प मेला पूरी रंगत में आ गया। दूसरे दिन हजारों लोगों मेले में जहां कलात्मक वस्तुओं का अवलोकन किया, वहीं जमकर खरीददारी भी की। बुधवार को उद़्घाटन दिन जहां 180 स्टाल ही लग पाए थे, वहीं दूसरे दिन इनकी तादाद बढ़कर 250 के पास पहुंच गई।
इस मर्तबा शिल्पमेला ब्रrासरोवर की उतरी परिक्रमा को पार करते हुए पूर्वी परिक्रमा के अधर तक पहुंच गया। जबकि दूसरे दिन भी विभिन्न प्रदेशों से शिल्पकारों का यहां पहुंचना जारी था। आयोजकों को उम्मीद नहीं थी कि इस बार शिल्प मेला पिछले साल की अपेक्षा ज्यादा विस्तार पाएगा। क्राफ्ट मेले में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक का शिल्प पहुंचा है।
कोई धातु से बनी कलाकृतियां लेकर पहुंचा है, तो जूट, चमड़े से बनी एक से बढ़कर एक बेहतरीन सामान प्रदर्शन व बिकने के लिए सजा है। उधर गीता जयंती समारोह की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया गया। सीटीएम व केडीबी सीईओ आरके सिंह के मुताबिक क्राफ्ट मेले के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इनका उद्देश्य जहां लोक कलाओं का सरंक्षण देना हैं, वहीं क्राफ्ट मेले को ज्यादा रोचक बनाना भी है। पहले दिन काफी बेहतर रिस्पांस मिला है।
मेले में मिले रिस्पांस से गदगद शिल्पी
शिल्पमेले ने दूसरे दिन ही अपनी छाप छोड़नी शुरू की। गुरुवार को सुबह से ही ब्रह्मसरोव दर्शकों व खरीददारों की भीड़ से भरा नजर आया। शिल्पकार भी मेले में मिले रिस्पांस से काफी खुश दिखे। शिल्पकारों में कई चेहरे ऐसे हैं, जो पिछले कई सालों से यहां शिरकत कर रहे हैं। चंबा से हाथ से बनी शानदार जूतियां लेकर पहुंची मार्शल कहती हैं कि वे पहली बार इस उत्सव में आई हैं।
पहले इसके बारे में सुना था, पहले दिन हालांकि कोई सेल नहीं हुई, लेकिन दूसरे दिन उनके सामान की काफी बिक्री हुई। मेले में खरीददारी करने पहुंची अलका व पप्पी ने बताया कि यहां आर्टिफिशयल ज्वैलरी की आइटम काफी शानदार हैं। वहीं हैंड एंब्रोडी व रोट आयरन का बना सामान काफी पसंद आया। अपनी पच् के साथ पहुंचे सेक्टर 13 वासी आनंद का कहना था कि कश्मीरी शाल के बारे में सुन कर ही वे खरीदने पहुंचे।
कहीं छपेली की गूंज, कहीं जिंदवा की धूम
क्राफ्ट मेले के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शुरू हो गए। ब्रrासरोवर के घाट स्टेज में बदल गए। जहां एक के बाद एक अलग अलग प्रदेशों से पहुंचे लोक कलाकारों ने अपनी अपनी संस्कृति की महक से दर्शकों को ना केवल परिचित कराया, बल्कि खूब तालियां भी बटोरी। उतराखंड के अल्मोड़ा से आई लोक कलाकारों की टीम ने छपेली व हारुल नृत्यगीत प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी।
अल्मोडा के संस्कार सांस्कृति एवं पर्यावरण सरंक्षण समिति के अध्यक्ष शेखर जोशी व सचिव प्रकाश बिष्ट के मुताबिक यह उतराखंड के लोक नृत्य हैं, जो विवाह समारोह या किसी अन्य खुशी के मौके पर होते हैं। पंजाब से आए कलाकारों ने जिंदवा और गिद्दे पेश कर दर्शकों को भी अपने साथ झूमने पर मजबूर किया। हिमाचल के कलाकारों ने ठोडा नृत्य से लोगों को रू ब रू कराया।
राजस्थानी कलाकारों ने कालबेलियां की मनमोहक प्रस्तुति से खूब समां बांधा। एंकरिंग कर रहे गुरदर्शन ने बीच बीच में चुटीले संवादों से दर्शकों को खूब हंसाया। एनजेडसीसी की प्रोग्राम आफिसर कमलेश व राधेश्याम के मुताबिक 12 दिवसीय इस मेले में बारी बारी से पांच पांच राज्यों के लोक कलाकारों को प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया है।










