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Saturday, Nov 28th, 2009, 4:27 am [IST]  

danik bhaskarफिल्म समीक्षा: कुछ कहती है कुर्बान

Rajesh yadav

फिल्म समीक्षा : कुर्बान

निर्देशक : रेंसिल डिसिल्वा

प्रोडच्यूसर: हीरू जौहर एवं करन जौहर

संगीत: सलीम-सुलेमान, शंकर -एहसान लॉय

कलाकार : सैफ अलि खान, करीना कपूर, विवेक ओबेरॉय, ओम पुरी, किरण खेर

ग्लोबल आतंक के खौफनाक सच से रुबरु कराती फिल्म कुर्बान एक बेहद गंभीर फिल्म है। बम केवल फूटना जानता है और उसका कोई मजहब नहीं होता है , मरने वाले से उसका कोई रिश्ता नहीं होता है, वह बस खौफ का एक भयानक मंजर छोड़ जाता है जिसमें मारे गए मासूमों लोगों के दर्द की दास्तानें होती है। फिल्म का कथानक बेहतरीन है और फिल्म के निर्देशक रेंसिल डिसिल्वा ने फिल्मों का बेहतरीन फिल्मांकन किया है। फिल्म कुर्बान कुछ सवाल करती है, मासूमों की मौत पर? मजहब के नाम पर आतंक फैला रहे भटके हुए लोगों से?

प्रोफेसर अवंतिका (करीना कपूर) अपने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रोफेसर एहसान (सैफ अलि खान) से मिलती है और दोनों को प्यार हो जाता है। अवंतिका कुछ दिन दिल्ली में रहने के बाद एहसान के साथ न्यूयार्क चली जाती है। शुरु में अवंतिका को यह पता नहीं होता कि उसका पति आतंकवादियों से मिला हुआ है लेकिन पड़ोस की एक महिला (नौहिद कुरैशी)की मौत के साथ उसे इस बात का पता चल जाता है। इसके साथ ही फिल्म में तेजी से घटनाक्रम चलता है जिसमें ईराक जा रहे एक अमेरिकी विमान को आतंकवादी बम से उड़ा देते है जिसमें 140 लोगों के साथ एक पत्रकार (दिया मिर्जा)की मौत भी हो जाती है। मृत पत्रकार (दिया मिर्जा) को अवंतिका इस बम की सूचना देने में असफल रहती है। बाद में इस बात की सूचना एक अन्य पत्रकार रियाज (विवेकओबेरॉय) को चल जाती है और वह अपने तरीके से एफबीआई की मदद से आतंकवादियों के अन्य दूसरे मसूंबो को रोकने का प्रयास करता है। फिल्म में इसके साथ ही तेजी से घटनाक्रम बदलता है जिसमें एक तरफ भाईजान और दूसरे आतंकवादी है तो दूसरी तरफ रियाज और अवंतिका का संघर्ष।

हेमंत चतुर्वेदी ने फिल्म की सिनेमैटोग्राफी में बेहतरीन काम किया है वहीं सलीम-सुलेमान, शंकर -एहसान लॉय की जोड़ी ने उम्दा संगीत दिया है। अनुराग कश्यप ने फिल्म में बेहतरीन सवांद लिखे है और हर सवांद दर्शक के सामने एक सवाल छोड़ता नजर आता है।

कलाकारों में सैफ ने नेगेटिव किरदार के साथ न्याय किया है वहीं करीना ने फिल्म के बोल्ड सीन के साथ -साथ भावनात्मक सीन में भी बेहतरीन नजर आई है। ओम पुरी ने भाईजान के किरदार और किरण खेर ने आपा के रोल में उम्दा काम किया है।

फिल्म की चर्चा उसके बोल्ड सीन को लेकर ज्यादा हो रहीं थी लेकिन बोल्ड सीन की चाहत रखने वालों के लिए यह फिल्म कुछ खास नहीं है। फिल्म कुर्बान 2009 में आतंकवाद पर बनीं एक सार्थक फिल्म है जो मजहबी उन्मदा से पैदा हुए आतंकवाद और चंद सिरफिरे लोगों के जूनून पर सवाल तो उठाती ही है लेकिन फिल्म यह भी बताने में सफल होती है कि हर मुसलमान आतंकवादी नहीं होता। निर्देशक ने पत्रकार रियाज के चरित्र से यह बात बताने की प्रयास किया है। प्यार और मजहबी उन्माद के बीच फिल्म कुर्बान इंसानियत की खोज करती एक सार्थक फिल्म है।
रेटिंग: ***


 





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विचार:

Praveen Varshney

Friday, 27th Nov 2009, 15:48
Film acchi hai...aur uska song..Ali maula mind blowing hai....

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