कराची में शरण लिए हुए है मुल्ला उमर
वाशिंग्टन। तालिबान के अफगानी गुट के सरगना मुल्ला मोहम्मद उमर ने अपना ठिकाना बदल लिया है और फिलहाल पाकिस्तान के कराची शहर में शरण ले रखी है।
एक अमेरिकी अखबार ने अमेरिका के तीन मौजूदा एवं पूर्व खुफिया अधिकारियों के हवाले से यह खबर दी है। अमेरिकी खुफिया सूत्नों ने इससे पहले दावा किया था कि मुल्ला उमर क्वेटा में शरण लिए हुए है, जहां वर्ष 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले के बाद अफगान तालिबान परिषद को कंधार से स्थानांतरित किया गया था।
अमेरिकी अखबार वाशिंगटन टाइम्स ने खुफिया विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों और एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा है कि पिछले महीने रमजान का पवित्न महीना खत्म होने के बाद मुल्ला उमर कराची पहुंचा है और इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने उसकी मदद की।
अखबार के अनुसार मुल्ला उमर ने क्वेटा से अपना ठिकाना बदलकर कराची इसलिए कर लिया ताकि वह अमेरिकी ड्रोन विमानों के हमले से बच सके। उसने कराची में नए वरिष्ठ नेतृत्व कौंसिल का गठन भी किया है।
अखबार ने कहा कि इस नए घटनाक्रम से इस आशंका को भी बल मिलता है कि अफगानिस्तान में पाकिस्तानी प्रभाव का विस्तार करने के लिए नब्बे के दशक में तालिबान के गठन में मदद करने वाली आईएसआई अफगानिस्तान में अमेरिका के हितों के खिलाफ काम कर रही है।
अखबार के मुताबिक खुफिया अधिकारियों में से दो ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपना नाम उजागर नहीं किए जाने की शर्त पर यह जानकारी दी है। वहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के वरिष्ठ अधिकारी एवं अलकायदा और तालिबान मामलों के विशेषज्ञ ब्रूस रिडल ने भी दावा किया है कि मुल्ला उमर हाल में कराची में देखा गया है।
रिडल ने कहा कि कराची में कई बडे़-बडे़ मदरसे हैं जहां मुल्ला उमर को आसानी से छिपाकर रखा जा सकता है। उन्होंने साथ ही कहा कि कराची में हुए आत्मघाती बम हमलों में तालिबान और अल कायदा का हाथ हो सकता है। अखबार का कहना है कि अभी तक इस बात के संकेत नहीं मिले हैं कि अल कायदा के शीर्ष आतंकवादी भी कराची कूच कर गए है।
रिडल ने कहा कि ओसामा बिन लादेन और उसका डिप्टी अमान अल जवाहिरी अब भी अफगानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तान के कबायली क्षेत्नों में हो सकते हैं।










