चांद पर जाने की तमन्ना है...
हमारा अगला मिशन अब नासा नहीं होगा। अब सपना चंद्रमा पर जाने का है। यह सपना बुड्ढा दल पब्लिक स्कूल के 24 छात्रों ने बंद नहीं बल्कि खुली आंखों से देखा है। जी हां 26 से 30 अक्टूबर तक नासा के अभियान से लौटे 24 छात्रों के स्कूली दल ने शुक्रवार को पत्रकारों को बताया कि उन्होंने नासा में जाकर न सिर्फ शैक्षणिक ज्ञान हासिल किया है, बल्कि दुनिया को एक अलग ही नजर से देखा है। अब वो दुनिया को बेहद ऊंचे से देखने की तमन्ना भी रखते हैं जो चांद पर जाकर ही पूरी हो सकती है।
इस मौके पर इस दल के साथ गई स्कूली की प्रिंसिपल डा. अमृत औजला और स्कूल प्रबंधक कमेटी की प्रधान सुखविंदर जीत कौर ने भी अपने अनुभव बताए।
कई वैज्ञानिकों से सीखे टिप्स: स्कूल प्रिंपिस अमृत औजला ने बताया कि लगातार तीसरे साल स्कूल की टीम नासा दौरा करके आई है। उन्होंने बताया कि इस बार का आयोजन इंजोयो स्पेस स्कूल ने किया था। इस टूर में बच्चों ने ज्ञान के अलावा ऐसी बातें भी सीखी जो उनके जीवन भर काम आएंगाी। बच्चों को नासा के स्पेस सेंटर के बहुत ही माहिर वैज्ञानिकों के साथ विचार- विमर्श करने का मौका भी मिला। इस टूर के दौरान होस्टन, औरलोंडो,जोनसम स्पेस सेंटर जाने का मौका भी मिला जहां बच्चों ने फ्लोरिडा, डिजनीलैंड और अैपकोट पार्क में जाकर खूब मजा लिया। बच्चों ने वहां महान वैज्ञानिक जेम्ज एस सैंपल से भी मुलाकात की जिन्होंने बच्चों को बेहद रोचक बातें बताईं। इस मौके पर बच्चों की ओर से कई तरह के प्रोजेक्ट बनाकर भी दिखाए गए। यह सभी प्रोजेक्ट डेव ब्राउन कैन हाम्ज के नेतृत्व में किए गए। बच्चों की भारतीय मूल के महान वैज्ञानिक सतीश रैडी से भी मुलाकात हुई। नासा से लौटे छात्रों का स्कूल प्रबंधन कमेटी समेत सभी अध्यापकों ने स्वागत किया।










