टमाटर ने अरमानों पर फेरा पानी
जसवंतपुरा
कस्बे समेत आस-पास के किसानों को अकाल की मार झेलनी पड़ रही है। पिछले तीन वर्षों में पर्याप्त बारिश के अभाव में क्षेत्र में टमाटर जैसी नकदी फसल की पैदावार में कमी आई है। लगातार कम बारिश और मौसम के दगा दे जाने से किसान अब टमाटर की बुवाई से डरने लगे है। करीब पांच वर्ष पहले तक यहां से उत्पादित टमाटर राज्य समेत अन्य प्रांतों में भेजे जाते थे, लेकिन विगत वर्षों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से क्षेत्र में टमाटर की फसल प्रभावित होने लगी है। इस वर्ष बरसात बिल्कुल भी नहीं होने से टमाटर की फसल ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों ने महंगे दाम पर उन्नत नस्ल का बीज खरीद कर टमाटर की बुवाई की थी। कई किसानों ने पौधे खरीद कर रोपे थे। लेकिन उपज से पहले ही टमाटर के पौधों ने दम तोडऩा शुरू कर दिया। अधिकतर किसानों ने कर्ज लेकर टमाटर की खराब हुई फसल व न के बराबर हुए उत्पादन ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। अब किसानों के सामने ऋण चुकाने को लेकर समस्या खड़ी हो गई है।
देशभर में होती है आपूर्ति
क्षेत्र के सुंधापर्वत के आसपास के जावीया, चेकला, किबला, राजीकावास, राजपुरा, दांतलावास, मनोहरजी का वास, कारलू, पावली, सावीधर, पहाड़पुरा, शिवगढ़, पूरण, पंसेरी, मालवाड़ा समेत कई गांवों में किसान प्रतिवर्ष टमाटर की बुवाई करते हैं। इन क्षेत्रों के टमाटर उत्तर प्रदेश, महाराष्टï्र, मध्यप्रदेश, पंजाब, दिल्ली, जम्मू कश्मीर समेत देशभर में आपूर्ति किए जाते है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से कम बारिश के चलते पैदावार में काफी कमी दर्ज की गई है। जिससे बाहरी क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि टमाटर को भी फसल बीमा योजना में शामिल करना चाहिए। फसल बीमा के अभाव में टमाटर की बुवाई को नुकसान होने पर किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है।
हम कृषि विभाग जालोर के आदेशानुसार प्रभावित क्षेत्रों में मिट्टी एवं पानी की जांच करवाते हंै। केंद्र पर कर्मचारियों की कमी होने से मिट्टी की जांच नहीं हो रही है। कठोर भूमि होने के कारण भी पौधा वृद्धि नहीं करता है तथा सूख जाता है।
डॉ. एस.आर. कुमावत, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र, केशवना
ञ्चमैंने खेत में करीब चालीस हजार रुपए खर्च कर टमाटर की बुवाई की थी, लेकिन उत्पादन शून्य रहा।
गोगाराम चौधरी, किसान, जावीया क्षेत्र
मैंने दस बीघा क्षेत्र में टमाटर की बुवाई की थी, लेकिन टमाटर लगने से पहले ही पौधे झुलस गए है।
मकनसिंह, किसान, किबला
इस बार टमाटर की फसल को काफी अधिक नुकसान हुआ है, जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। राज्य सरकार की ओर से किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
रघुनाथाराम, हाजाराम, बदाराम, किसान, राजीकावास
फसल बीमा के अन्तर्गत टमाटर की फसल को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है।
जे.के. जुनेजा, शाखा प्रबन्धक, एसबीबीजे, जसवंतपुरा
टमाटर की फसल लगातार तीन वर्षो से खराब हो रही है। कीटनाशक दवाओं का उपयोग नहीं करने से फसलों में कीड़े लगने से भी फसलें खराब होती है। इसके साथ गर्मी अधिक होने तथा किसानों द्वारा जमीन नहीं बदलने से भी टमाटर की फसल को नुकसान होता है।
भीखमचंद पालीवाल, खंड अधिकारी, कृ षि विभाग जसवंतपुरा










