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Saturday, Nov 21st, 2009, 1:07 am [IST]  

danik bhaskarश्री बाला जी इंस्टीट्यूट है स्टूडेंट्स के साथ

पटियाला

दसवीं, बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद विद्यार्थी एक ऐसे चौराहे पर खड़े होते हैं, जिसके चारों और अलग- अलग रास्ते तथा अलग- अलग दिशएं होती हैं। इनमें से बहुत सोच समझ कर कोई रास्ता चुनना होता है। कैरियर का चुनाव हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है। बारहवीं तक की गई मेहनत भी बेकार चली जाएगी। बारहवीं तक पढऩे के बाद यह तो पता चल ही जाता है कि कौन से विषय में आपकी रुचि है और किन विषयों में आप अपनी क्षमता का अधिकाधिक उपयोग कर सकते हैं। यदि आपको लगता है कि स्कूल स्तर पर आपके जो विषय थे, उनमें बहुत कुछ कर दिखाने की गुंजाइश नहीं है तो विषय बदलने में कोई बुराई नहीं है। इसलिए जरूरी है कि कोई भी निर्णय लें, तो पूरी गंभीरता से सोच-समझकर लें। डॅा. संजय कुमार सैनी ने बतायाकि आधुनिक भौतिक परिवेश में व्यवयायिक कोर्सों का मरहत्व बढ़ा है, जिसके चलते छात्रों का रूझाान रोजगारोन्मुखी कोर्सों की ओर बढ़ा है। आज शिक्षा का सीधे-सीधे रोजगार से जुड़ाव हो गया है या यूं कहें कि शिक्षा का मतलब रोजगार की प्राप्ति ही रह गया है। इसके लिए उन्हें उचित माहौल व सही शिक्षा संस्थान की जरूरत होती है, ताकि उन्हें सही मार्ग दर्शन प्राप्त हो सके। इस दिशा में श्री बाला जी इंस्टीट्यूट ऑफ पैरा मेडिकल आईटी मैनेजमेंट बड़ी अहम भूमिका निभा रहा है, जोकि आफिसर कालोनी स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास स्थित है।

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