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Saturday, Nov 21st, 2009, 1:18 am [IST]  

danik bhaskarबेटियां बचाने के लिए आगे आई बेटी

Bhaskar Correspondent

ambalaअम्बाला. अब बेटी को बचाने के लिए बेटी ने ही संघर्ष शुरू कर दिया है। लोगों को भ्रूण हत्या के प्रति चेताने के लिए चंडीगढ़ की 12 वर्षीय इशिता उप्पल ने बीड़ा उठाया है। इसी अभियान के तहत वह शुक्रवार पहुंची और लोगों को बताया कि बेटी-बेटे में कोई अंतर नहीं है।



लोगों को बस अब अपनी सोच बदलनी होगी तभी कन्या भ्रूण हत्या जैसे महापाप से बचा जा सकेगा। इशिता ने लोगों को जागरूक करने के लिए यह अभियान वीरवार को चंडीगढ़ से सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा हरी झंडी देकर शुरू किया है।



शुक्रवार को अम्बाला पहुंचने पर एडीसी सुमेधा कटारिया ने नन्ही बच्ची इशिता उप्पल के साथ उनकी मम्मी इंग्लिस लेक्चरार मीना व पिता डा. दीपश्री का स्वागत किया। पंचकूला स्थित स्कूल में 7वीं कक्षा की छात्रा ईशिता उप्पल को कन्या भ्रूण हत्या के बारे में ढाई साल पहले जानकारी नहीं थी।



टीवी, अखबारों में कन्या भ्रूण हत्या को लेकर किए जा रहे कार्यक्रम व भाषण सुनकर कन्या भ्रूण हत्या के बारे में जानना चाहा। इस कुरीति को लेकर उप्पल ने पिता से सवाल किए और पिता ने जानकारी दी। इसके बाद तो ईशिता उप्पल ने स्कूल व अन्य कार्यक्रमों में कन्या भ्रूण हत्या के बारे में भाषण देने लगी और मन में ठान लिया कि लोगों को जागरूक करने के लिए एक न एक दिन अभियान शुरू किया जाएगा।



लोगों को जागरूक करने के लिए ईशिता उप्पल अपने साथ एक नन्ही बच्ची का पुतला रखती है। इनका कहना है कि कन्या भ्रूण हत्या ग्रामीण क्षेत्र में अधिक होती है। कन्या भ्रूण हत्या के बारे में जब तक बच्चा-बच्चा नहीं जानेगा तब तक यह कुरीति रूकने वाली नहीं है। कन्या भ्रूण हत्या को जड़ से खत्म करना है तो लोगों को जागरूक होना ही पड़ेगा।



परिवार की भूमिका रोक पाएगी भ्रूण हत्या को



एडीसी सुमेधा कटारिया ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने में परिवार की भूमिका सबसे अधिक होती है। आज के समय में लोग पता नहीं क्यों इस कुरीति को बढ़ा रहे हैं। बेटे से बढ़कर बेटी समझनी चाहिए। अगर यह कुरीति रूकी नहीं तो मानव जाति पर बहुत बढ़ा कलंक है। सामाजिक संस्थाओं ने भी कन्या भ्रूण के प्रति अभियान जारी रखने की जरूरत है।

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