नगर निगम में सन्नाटा अफसर दिखा रहे पावर
निगम के गलियारे में आचार संहिता लगने के बाद शुक्रवार को सन्नाटा पसरा हुआ नजर आया। पार्षदों और महापौर के अधिकार और पावर लगभग खत्म हो गए हैं। आचार संहिता लगने के बाद हर तरह के जनकल्याण के नए कार्य बंद हो गए हैं। निगम के सभी जोनों में राशन कार्ड, नया नल कनेक्शन, एकल खिड़की प्रणाली आदि को बंद कर दिया गया है।
अफसरों के दस्तखत के बाद ही किसी आयोजन की अनुमति मिल रही है। शुक्रवार को स्थिति यह थी कि मोहल्ले के एक मैदान में क्रिकेट मैच करवाने के इच्छुक पार्षद को निगम के आला अफसर ने घंटों दफ्तर के बाहर खड़ा रखा। पार्षद की अनुयय के बाद पसीजे अफसर ने बड़ी मुश्किल से उन्हें ग्राउंड में मैच खेलने की अनुमति दी।
दूसरी ओर पिछले एक हफ्ते के दौरान नेताओं के दम पर ठेकेदारों ने अनेक बार अपने बकाया भुगतान को लेकर कमिश्नर को घेरा था। निगम के गलियारों में हर वक्त मौजूद रहने वाली ठेकेदारों की लॉबी भी आज नजर नहीं आई।
शहर की सड़कों पर लगे नेताओं के चेहरे वाले पोस्टरों और होर्डिग्स हटाने का सिलसिला अफसरों ने शुरू कर दिया है। नगर निवेशक संदीप बागड़े ने बताया कि गुरुवार शाम से ही सभी जोन कमिश्नरों को हर्ो्िडग, बैनर, पोस्टर हटाने के निर्देश दिए गए थे। देर शाम से ही कार्रवाई शुरू हो गई थी। जोन कमिश्नरों ने हर सड़क से ट्रक भर-भरकर हर्ो्िडग उतारे।
दूसरी ओर देवेंद्रनगर, शंकर नगर, तेलीबांधा, सुंदर नगर, गुढ़ियारी सहित अनेक सड़कों पर अभी नेताओं के चेहरे अटे पड़े हैं। इनको हटाने में भी निगम का काफी पैसा खर्च हो रहा है।










