नई दिल्ली. खरा बोलने के लिए मशहूर पर्यावरण व वन मंत्री जयराम रमेश ने शुक्रवार को शहरों में कचरे के निस्तारण में बरती जा रही लापरवाही पर नाराजगी जताई। उन्होंने यहां तक कह डाला कि दुनिया में सबसे अधिक गंदगी व कचरा भारतीय शहरों में ही पाया जाता है। गंदगी के लिए अगर कोई नोबेल पुरस्कार होता तो वह हमारे देश को ही मिलता।
‘ग्रीन इंडिया 2047’ नामक रिपोर्ट जारी करते हुए रमेश ने कहा, ‘हमारे शहर दुनिया के सर्वाधिक गंदे शहरों में से हैं। धूल व गंदगी के लिए कोई नोबेल होता तो भारत को ही मिलता।’ उनके इस कथन का आधार भी यही रिपोर्ट थी, जिसमें शहरों में ठोस कचरे के प्रबंधन के नाकाफी इंतजामों पर प्रकाश डाला गया है। द एनर्जी व रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (टेरी) द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि नगरीय निकाय साफ-सफाई व कचरे से निपटने के काम में लापरवाही बरतते रहे हैं। रमेश ने इस बात पर नाराजगी जताते हुए जरूरी कदम उठाने की बात कही।
स्वास्थ्य सुधार पर भारी खर्च : रिपोर्ट के अनुसार, देश में बीमारियों व विकलांगता पर जीडीपी का 3.6 फीसदी खर्च करना पड़ रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि देश की 45 फीसदी जनता को पीने योग्य पानी तक उपलब्ध नहीं है। 85 फीसदी शहरों में वायु प्रदूषण नियंत्रण के मानकों की खुली अनदेखी की जा रही है।
राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल विधेयक
रमेश ने कहा कि सरकार इस वर्ष ‘राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल विधेयक 2009’ पारित करवाने का प्रयास करेगी। इससे सिविल कोर्ट के समकक्ष एक विशेष ट्रिब्यूनल गठित किया जा सकेगा, जो पर्यावरणीय विवाद सुलझाने का काम करेगा। विधेयक संसद में पेश किया जा चुका है।स्थाई समिति इस पर गौर कर रही है, जिसकी रिपोर्ट सोमवार तक आने की संभावना है।
विनिवेश का पैसा पर्यावरण पर खर्च हो
देश के प्रमुख पर्यावरणविद् व अर्थशास्त्री इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के विनिवेश से अर्जित राशि का बड़ा हिस्सा पर्यावरण की गतिविधियों पर खर्च किया जाना चाहिए। ‘द एनर्जी एंड र्सिोसेज इंस्टीट्यूट (टेरी)’ द्वारा जारी ‘ग्रीन इंडिया 2047’ रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है।
हर वर्ष आठ लाख मौतें!
रिपोर्ट में बताया गया है कि दूषित वायु व पानी के चलते देश में हर वर्ष आठ लाख लोगों की जान जा सकती है। देश में पर्यावरण आधारित सेवाओं (पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना, मल निकासी, वायु व जल प्रदूषण नियंत्रण, औद्योगिक व आवासीय कचरे की व्यवस्था) आदि का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ता है।











