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Saturday, Nov 21st, 2009, 2:17 am [IST]  

danik bhaskar5 नहीं, 1 साल गारंटी

Bhaskar Correspondent

karnalकरनाल. हुडा के सेक्टर-7 की सड़क बनाने का टेंडर आखिरकार पास हो ही गया। यह बात अलग है कि इसके लिए अधिकारियों को काफी मेहनत करनी पड़ी। सेक्टर की सड़क बनाने के लिए जारी किए टेंडर के लिए कई बार काल की गई, लेकिन टेंडर के साथ जुड़ी हुई शर्तो के चलते महीनों तक टेंडर लटका रहा।



इसी बीच दो बार चुनावों की वजह से भी टेंडर में देरी हुई। बाद में शर्तो में ढील देने पर ही टेंडर पास हो सका। दरअसल हुडा ने सेक्टर-7 की सड़क बनाने के लिए टेंडर के साथ पांच साल तक सड़क के रिपेयर करने की शर्त जोड़ दी। टेंडर के साथ पांच साल की गारंटी की शर्त जुड़ने से लाख कोशिशों के बाद भी किसी ने भी टेंडर नहीं उठाया। इसके बाद हुडा ने टेंडर में दी गई पांच साल की शर्त को घटाकर तीन वर्ष कर दिया। बावजूद इसके ठेकेदारों ने टेंडर नहीं उठाया।



आखिरकार हुडा ने टेंडर में सड़क की मरम्मत करने की गांरटी एक वर्ष निर्धारित कर दी। आखिर इस पर टेंडर पास हो गया। हुडा से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि आज के प्रतिस्पर्धा के दौर में कम से कम कीमत पर टेंडर उठाकर सड़क तो बनाना चाहते हैं, लेकिन कोई भी पांच वर्ष तक सड़क को ठीक रखने के लिए गारंटी लेने को तैयार नहीं था।



इस वजह से टेंडर लटका रहा। वहीं दूसरी ओर सेक्टरवासियों द्वारा हुडा पर सड़क बनाने का दबाव बढ़ रहा था। अब जल्द ही सेक्टर में सड़कों की दशा सुधारने का काम शुरू हो जाएगा। लेकिन सड़क कितने दिनों तक चलेगी इसकी गारंटी एक साल से ज्यादा की नहीं होगी। जबकि अब तक पांच साल की रिपेयर की गांरटी के बाद ही सड़क का टेंडर पास किया जाता था।



फिर टूटी हीं रहेंगी हुडा की सड़कें !



करनालx अब सड़कों की उम्र कम हो गई है। पहले एक बार सड़क बनने के बाद विभाग व लोगों को यह पता था कि यह पांच साल तक खराब नहीं होगी। लेकिन अब एक साल बाद यदि खराब हो गई तो ठीक कौन करेगा? यह चिंता रहेगी। सरकारी विभागों की लंबी कागजी कार्यवाई में हर साल सड़क की मरम्मत कराने की बात सोचना बेमाइनी होगी।



वहीं ठेकेदार की गारंटी पांच के स्थान पर एक साल रह जाने के कारण वह एक साल बाद मरम्मत के बंधन से मुक्त होगा। ऐसे में मैटेरियल सही लेगगा इसकी भी कोई गांरटी नहीं। वैसे ठेकेदारों का कहना है कि सबसे कम के चक्कर में प्रतिस्पर्धा इतनी हो जाती है कि क्वालिटी मैनटेंन रखना कठिन होता है।



अधिकारियों को चाहिए वे कोई ऐसा नियम बनाएं ठेकेदार ज्यादा कम के चक्कर में क्वालिटी से समझौता न करें। तभी क्वालिटी ठीक रह सकती है। यदि एक साल बाद ही सड़कें टूटी तो इससे विभाग व जनता दोनों को नुकसान होगा। अब जब सेक्टर सात का टेंडर एक साल की गारंटी पर छूटा है तो ठेकेदारों के दबाव में आगे भी यह प्रथा जारी रह सकती है।



सड़क के टेंडर के साथ पांच वर्ष तक रिपेयरिंग की गारंटी की कंडिशन जोड़ने की वजह से टेंडर पास नहीं हो पा रहा था। इसलिए रिपेयरिंग की अवधि घटाकर एक वर्ष कर दी गई। टेंडर पास हो गया है जल्द काम शुरू हो जाएगा। - प्रेम सिंह, एसडीओ हुडा करनाल



111.25 लाख से सुधरेगी तीन सड़कों की दशा



शहर की स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने के अलावा नगर परिषद ने शहर की सड़कों की दशा सुधारने का भी फैसला लिया है। इसके लिए हाउस की बैठक में महत्वपूर्ण फैसले भी लिए गए है। जिस पर नगर परिषद अध्यक्ष, ईओ व पार्षदों ने सहमति भी जताई।



इस फैसले के अनुसार शहर की तीन सड़कों के नवीनीकरण पर 111.25 लाख रुपए खर्च होंगे। नवीनीकरण में न केवल जर्जर सड़कों को रिपेयर किया जाएगा, बल्कि उन्हें चौड़ा भी किया जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि निर्माण कार्य होने के बाद लोगों की दिक्कत समाप्त हो जाएगी।



इन सड़कों पर होगा खर्च



माडल टाउन में जनता करियाना स्टोर से एसबीआई मेन रोड वाया रोजगार कार्यालय की सड़क को 18 लाख, एसबीआई बैंक दुकान नंबर 152 के पास अनाजमंडी में मैटल रोड को 7.25 लाख रुपए व कर्ण गेट से मीरा घाटी चौक तक की सड़क को रिपेयर करने का कार्य 86 लाख रुपए से होगा।



नगर परिषद हाउस की मीटिंग में तीनों सड़कों को रिपेयर करने के फैसले पर सहमति हुई है। इसके लिए एक लाख रुपए की ग्रांट चंडीगढ़ कार्यालय से आ चुकी है, बाकी की राशि नगर परिषद के कोष से खर्च की जाएगी। - सतबीर अहलावत, ईओ नगरपरिषद करनाल

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