Saturday, Nov 21st, 2009, 2:28 am [IST]  

danik bhaskarमहिला महापौर के लिए दावेदारों में जंग

भास्कर न्यूज

रायपुर. राजधानी की पहली महिला महापौर के लिए जंग शुरू हो गई है। मतदाताओं के सामने जाने के पहले कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की दावेदारों को अपने नेताओं का मन जीतना होगा। कांग्रेस में आज महापौर पद के लिए एक दर्जन दावेदार सामने आ चुके हैं। कुछ और इच्छुक कतार में हैं, लेकिन उन्होंने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।



पार्टी के अंदर प्रतिद्वंद्वियों के नाम कटवाने का अभियान भी शुरू हो गया है। सभी विरोधियों के इतिहास को खंगालने में लगे हैं, ताकि उसके आधार पर टिकट कटवाया जा सके। कांग्रेस भवन में होने वाले कार्यक्रमों में महापौर पद की दावेदारों की सक्रियता देखते बन रही है।



महापौर के चुनाव में इस बार सबसे बड़ी समस्या मतदान के दौरान चुनाव प्रबंधन और इसमें होने वाला मोटा खर्च शामिल है। राजधानी के मतदाता 27 दिसंबर को अपने इलाके के पार्षद के अलावा महिला महापौर का चुनाव करेंगे। कांग्रेस की तरफ से अब तक जितने भी दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं, उनको किसी ने किसी गुट या बड़े नेता का समर्थन हासिल है।



यही वजह है कि पार्टी भी हर काम फूंक-फूंककर अंजाम दे रही है। भितरघात की आशंका को देखते हुए नेता नामों की घोषणा में जल्दबाजी नहीं करना चाहते। अब तक जो नाम सामने आ रहे हैं, उनमें किरणमई नायक, डॉ. रुचि दुबे के अलावा शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल की पत्नी सरोजनी धाड़ीवाल, विधायक कुलदीप जुनेजा की पत्नी परमजीत जुनेजा, श्रीमती सुमन पाठक, राजबाला श्रीवास्तव, बबिता नत्थानी, कल्पना पटेल का नाम शामिल है।



पूर्व महापौर और मंत्री तरुण चटर्जी ने अपनी पत्नी पिया चटर्जी का नाम आगे करके की समीकरणों को उलझा दिया है। दावेदारों ने टिकट का फैसला होने के पहले अपने स्तर पर प्रचार शुरू कर दिया है। समाज के अलावा दूसरे संगठनों से मिलकर समर्थन हासिल करने की कोशिश चल रही है।



किरणमई नायक का नाम काफी समय से पार्टी के अलग-अलग मंचों पर उठता रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनका नाम सामने आया था। पेशे से वकील नायक को महापौर पद के मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है। उनके विरोधी जातिगत मुद्दे को उठा रहे हैं। उनकी दलील है कि रायपुर महापौर का पद अनारक्षित महिला के लिए है, यानि यहां सामान्य वर्ग की महिला प्रत्याशी खड़ी हो सकती है।



नायक ओबीसी हैं। सामान्य सीट से किसी सामान्य को ही टिकट देने की वकालत कर रहे कुछ लोग इस बात को लेकर आला कमान पर दबाव बना रहे हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। नायक को वहां से खड़ा किया जाए। पिछले कई महीनों से चुनाव की तैयारी कर रही नायक और उनके समर्थक नेताओं को इसके लिए तैयार करना आसान नहीं होगा।



दूसरी तरफ डॉ. रुचि दुबे के बारे में माना जाता है कि मोतीलाल वोरा गुट के नेताओं का समर्थन उनको हासिल है। पेशे से चिकित्सक डॉ. दुबे पिछले कई सालों से विवेकानंद आश्रम के अस्पताल में सेवाएं देती आ रही हैं। नया चेहरा, इमेज उनका सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष है। राजनीति में डॉ. दुबे का अनुभवहीन होना कुछ नेताओं को खटक रहा है। इंदरचंद धाड़ीवाल अपनी पत्नी सरोजनी के लिए जुटे हैं।



उनका दावा है कि टिकट मिली तो वह अपनी पत्नी को आसानी से विजयश्री दिलवा देंगे। वह प्रदेश के हर बड़े नेता के संपर्क में हैं। सरोजनी पहले भी वार्ड पार्षद रह चुकी हैं। विधायक कुलदीप जुनेजा भी अपनी पत्नी परमजीत के लिए पूरी ताकत लगाकर बैठे हैं। सामाजिक संगठनों में परमजीत सक्रिय रही हैं। दावेदारों में सुमन पाठक सबसे वरिष्ठ महिला कांग्रेसी हैं। पिया चटर्जी का भी सबसे बड़ा संबल उनके पति तरुण चटर्जी हैं, जो महापौर, विधायक और मंत्री रह चुके हैं।



चुनाव लड़ने के बेहतर अनुभव के बावजूद चटर्जी ने साफ कर दिया है कि उनकी पत्नी टिकट मांगने किसी के पास नहीं जाएगी। पार्टी ने टिकट दिया तो ही पिया चुनाव लड़ेंगी, वरना नहीं।

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