प्रदेश का अधिकार है अलग हाईकोर्ट
रोहतक & अलग हाईकोर्ट केवल वकीलों का ही नहीं बल्कि प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है। सरकार को प्रदेशवासियों को उनका हक दिलाने के लिए अलग हाईकोर्ट बनवाना चाहिए। वकीलों ने दैनिक भास्कर द्वारा उठाए गए इस महत्वपूर्ण मुद्दे का जोरदार शब्दों में समर्थन किया है।
सरकार को मंथन करने की जरुरत
ऐसे कब तक दो प्रदेशों की राजधानी और हाईकोर्ट एक रहेगा। सरकार को इस संबंध में गंभीरता से मंथन करना चाहिए, ताकि प्रदेशवासियों को उनका हक मिल सके। अलग हाईकोर्ट मिलने से लोगों को फायदा होगा और सस्ता और शीघ्र न्याय मिलेगा। लोगों ने भी प्रदेश भर में इसको लेकर आवाज बुलंद
करनी चाहिए।
गौरव, एडवोकेट
गरीब लोगों को नहीं मिल पाता न्याय
हाईकोर्ट चंडीगढ़ में होने के कारण कई बार आर्थिक रूप से कमजोर आदमी कोर्ट में जाने से कतराता है। जिसके कारण उसकी न्याय पाने की इच्छा मन में ही रह जाती है। अगर हाईकोर्ट प्रदेश के बीच में हो तो
प्रत्येक व्यक्ति कम दूरी तय करके न्याय के लिए आसानी से पहुुंच पाएगा और आर्थिक रूप से न्याय से वंचित
नहीं रहेगा।
जयभगवान, एडवोकेट
अलग हाईकोर्ट मतलब शीघ्र न्याय
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ में तीस वर्र्षों से भी पुराने केस पेंडिंग पड़े हैं। इसका सीधा सा मतलब है कि जस्टिस पर वर्कलोड अधिक रहता है, जिसके कारण समय पर सुनवाई नहीं हो पाती। अगर दोनों प्रदेशों का हाईकोर्ट अलग-अलग बना दिया जाए तो समय पर केसों की सुनवाई होगी और लोगों को शीघ्र
न्याय मिलेगा।
करण भारद्वाज, एडवोकेट
वकीलों को मिलेंगे जज बनने के अवसर
अलग से हाईकोर्ट बनने के बाद जजों की संख्या भी अधिक होगी। इसमें प्रदेश के वकीलों को जज बनने के अवसर मिलेंगे। यही नहीं प्रदेश के लोगों के पास न्यायिक पावर होगी और लोगों को अधिक लाभ मिलेगा।
युवा वकीलों को हाईकोर्ट में
प्रेक्टिस करने का मौका मिलेगा, जिससे बेहतर एडवोकेट निकल कर सामने आएंगे।
प्रदीप, एडवोकेट










