सरस्वती के वजूद को तलाशने की कवायद
कैथल. ऐतिहासिक सरस्वती नदी के वजूद को तलाशने और उसे जिंदा करने की कवायद एक बार फिर शुरू होने जा रही है। देश विदेश से धर्माचार्य, इसरो के वैज्ञानिक, इतिहासकार और प्रदेश सरकार के मंत्री एक साथ मिलकर सरस्वती को धरातल के ऊपर निकालने के लिए मंथन करेंगे।
इस पुनीत कार्य के लिए महाभारत की पवित्र धरा को चुना गया है। कुरुक्षेत्र की धरती पर शनिवार से अंतरराष्ट्रीय स्तर की कांफ्रेंस में ‘रिवाइवल आफ सरस्वती रिवर’ मिशन शुरू होगा। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तर्ज पर सरस्वती विकास प्राधिकरण बनाकर इस मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जाएगा।
अपने उद्गम स्थल आदिबद्री से निकलकर सरस्वती नदी यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, पिहोवा, कैथल और कलायत होते हुए राजस्थान की ओर निकलती थी। पिछले दिनों कलायत के कपिलमुनि तीर्थ पर फूटी जलधारा इस मिशन से जुड़े लोगों के लिए शुभ संकेत के रूप में रही, लेकिन इन पर ज्यादा काम नहीं हो पाया।
सीवन के पास से गुजरते हुए भी सरस्वती अवैध कब्जे की चपेट में आकर अपना अस्तित्व खो बैठी। हालांकि प्रदेश सरकार ने बीबीपुर झील के रास्ते इसे प्रवाहित करने का प्रयास किया, लेकिन वह पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ पाया।
यह होंगे कांफ्रेंस के मुद्दे
कांफ्रेंस के कन्वीनर डा.एआर चौधरी के मुताबिक इसमें सरस्वती नदी के उद्गम को चिन्हित करते हुए इसके पुनरुत्थान की योजना तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों के प्रपत्रों और भूवैज्ञानिक जानकारियों से इसके वजूद का सही रेखांकन होगा। सरस्वती के बढ़ते जलस्रोतों के सामथ्र्य को खंगाला जाएगा। सरस्वती नदी से जुड़ी समकालीन संस्कृति और सभ्यता का खुलासा किया जाएगा।
यह होंगे वक्ता
दो दिन चलने वाली इस कांफ्रेंस में जगदगुरु शंकराचार्य रहनुमाई करेंगे। पहले दिन पेट्रोलियम मंत्रायल भारत सरकार के सचिव आरएस पांडेय, प्रदेश के सिंचाई, वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव, केयू के वीसी लेफ्टिनेंट जनरल डा.डीडीएस संधु, ओएनजीसी से डा.डीएस मित्रा और एसके सिन्हा, पुरातत्ववेता डा.वीएमके पुरी और डा.बलदेव सहाय, इसरो से डा.जेआर शर्मा और डा.बीके भाद्रा, चेन्नई से डा.एस कल्याणरमन, एचएआरएसएसी के डा.अनूप कुमार और डा.आरएस हुड्डा, केयू के डा.एआर चौधरी, दर्शन लाल जैन और प्रो.केएस वैद्यया सरस्वती नदी के पुनरुत्थान पर चर्चा करेंगे।
दूसरे दिन हरियाणा के एडवोकेट जनरल एचएस हुड्डा, प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश जैन, गोपाल कांडा, अमेरिका की अटलांटा यूनिवर्सिटी के डा.भूदेव शर्मा, इस्टोनिया के टारटू यूनिवर्सिटी के डा.ज्ञानेश्वर चौबे, इंग्लैंड की कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के सीए पैट्री और डा.आरएन सिंह, राजेश पुरोहित सरस्वती के संबंध में अपने शोध प्रपत्र पटल पर रखेंगे।
अपना अस्तित्व खो चुकी सरस्वती नदी के पुनरुत्थान के सरकार द्वारा किए गए प्रयास नाकाफी और असंतोषजनक हैं। इनकी गति को तेज करने और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की तर्ज पर सरस्वती विकास प्राधिकरण बनाने की जरूरत है ताकि इस मिशन को तेजी प्रदान की जा सके। इस कांफ्रेंस में यही सब निर्धारित किया जाएगा। - दर्शन लाल जैन, अध्यक्ष सरस्वती नदी शोध संस्थान










