नगर निगम का सिस्टम बदला
चुनावी आचार संहिता लगने के तत्काल बाद नगर निगम कमिश्नर ओमप्रकाश चौधरी ने नगर निगम के कार्र्यो का नए सिरे से बंटवारा कर दिया है। निगम के गलियारों में जिन अफसरों की तूती बोला करती थी, उन्हें फेरबदल में किनारे लगा दिया गया है।
कमिश्नर ने सबसे पहले ऐसे अफसरों के पर कतरे हैं, जो महापौर व मेयर इन काउंसिल के पार्षदों के काफी नजदीक थे। कार्य का विभाजन पहले भी किया जा सकता था, लेकिन आचार संहिता लगने के तत्काल बाद अफसरों के कामों का प्रभार बदला गया।
स्वास्थ्य अधिकारी डा. अमृत चोपड़ा से सामान्य प्रशासन का काम लेकर उपायुक्त वित्त श्रीकृष्ण दुबे को दे दिया गया है। अफसरों के बीच इस बात को लेकर सबसे अधिक चर्चा थी कि आखिर आचार संहिता लगने के तत्काल बाद ही सामान्य प्रशासन से डॉ. चोपड़ा को क्यों हटाया गया। वे महापौर के करीबी माने जाते हैं।
निगम के तीन उपायुक्तों में सबसे अधिक अधिकार योजना उपायुक्त आलोक चंद्रवंशी को दिए गए हैं। उनको केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत होने वाली एक हजार करोड़ रुपए के कार्र्यो को देखने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके तहत जेएनआरयूएम के तहत बीएसयूपी, पेयजल आवर्धन योजना, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, सिटी बस मैनेजमेंट, भूमिगत नाली योजना और ट्रैफिक सिस्टम की जिम्मेदारी के साथ शिक्षा, अग्निशमन, योजना व अन्य विभाग दिए गए हैं।
वित्त विभाग के उपायुक्त श्रीकृष्ण दुबे को भी दर्जन भर से अधिक विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। इन्हें वित्त के साथ ही सामान्य प्रशासन और लीगल मामले संभालने का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है।










