मोबाइल ने दिया जीवनदान
फिल्म कुली में अमिताभ बच्चन के बैच नंबर 786 में गोली टकराने से उसकी जान बची। इसी तरह फिल्म दीवार में अमिताभ बच्चन के गले में पहने लॉकेट ने गोली से अमिताभ की जान बचाई। खैर यह बात ठहरी फिल्मों की, लेकिन यहां हकीकत में मोबाइल एक युवक की जान बचा गया। जी हां पातड़ां के गांव नयाल के सरकारी किरती कालेज निहाल में हुई गोलीबारी से घायल हुआ एमएससी(आईटी) के छात्र बघेल सिंह के लिए मोबाइल जीवन रक्षक बना। बघेल सिंह ने जेब में मोबाइल डाला हुआ था और गोली मोबाइल से टकराते हुए उसकी जांघ को चीरते हुए आगे निकल गई। बघेल सिंह व कालेज छात्रों ने इस घटना के लिए सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। स्टूडेंट्स दो गु्रपों में बंटे हुए हैं। आउटसाइडर कभी भी दीवार फांदकर कालेज में दादागिरी दिखाकर निकल जाते हैं। लेकिन कालेज पिं्रसिपल ने अब तक कदम नहीं उठाया है।
आउटसाइडर्स से विद्यार्थी असुरक्षित : पहले पटियाला के तीन कालेजों में आउटसाइडर के आतंक और अब पातड़ां तक भी पहुंच गया है। इस संबंधी समाचार दैनिक भास्कर ने 20 नवंबर को प्रकाशित किया था। आउटसाइडर द्वारा कालेज में आतंक फैलाने का सिलसिला पटियाला के महिंदरा कालेज से शुरू हुआ। एक आउटसाइडर सभी नियमों को ताक में रखकर एक लड़की से बात करने की कोशिश करने लगा। जब छात्रा ने बात करने से इंकार कर दिया तो लड़के ने भरे कालेज में उसे तमाचा मार दिया। इसके बाद इसी कालेज में कुछ आउटसाइडर घुसे और लड़कियों से छेड़छाड़ करने लगे। वह आउटसाइडर हैं और पुलिस ने उन्हें मात्र चेतावनी देकर छोड़ दिया। इसी सप्ताह वीर हकीकत राय स्कूल में बाहर के लड़के घुसे और छात्रों की पिटाई कर दी। शुक्रवार को आउटसाइडर्स द्वारा पातड़ां में सरेआम गोली चलाई गई और एक छात्र को घायल कर दिया।










