Saturday, Nov 21st, 2009, 2:47 am [IST]  

danik bhaskarबीमारी से मरने वाले का परिवार मुआवजे का हकदार

भास्कर न्यूज

चंडीगढ़. पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि सीमा पर ड्यूटी के दौरान दुश्मन की गोली खाने वाले सैनिक का परिवार ही मुआवजे का हकदार नहीं बल्कि कड़ी ठंड के चलते जान देने वाले सिपाही का परिवार भी मुआवजे का हकदार है।

ऐसे ही एक मामले में जस्टिस प्रमोद कोहली ने जम्मू कश्मीर सीमा पर तैनात हवलदार सुभाष चंद्र की पत्नी को मरणोपरांत दिए जाने वाला मुआवजा लाभ तीन माह में अदा करने का आदेश दिया है। कैथल निवासी संतोष ने याचिका में कहा कि उसका पति सुभाष चंद्र की जम्मू कश्मीर में ड्यूटी थी। 3 नवंबर 2005 को उसे सूचना दी गई कि ऑपरेशन कर्मा के दौरान कश्मीर के गोरेज सेक्टर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में उसका पति शहीद हो गया है।



उसने शहीद की विधवा को मिलने वाले लाभ दिए जाने की मांग की। 18 अप्रैल 2006 को उसकी मांग यह कहकर खारिज कर दी गई कि उसके पति की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई। ऐसे में उसे लाभ नहीं दिए जा सकते। जस्टिस कोहली ने फैसले में कहा कि दोनों पक्ष इस बात से सहमत हैं कि ज्यादा ठंड के चलते सुभाष की मौत हुई। इसे किसी भी तरह से ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाने से अलग नहीं समझा जा सकता। ड्यूटी पर रहते ठंड से हुई मौत के इस मामले को केंद्र सरकार की 30 सितंबर 1999 के निर्देशों के मुताबिक देखे जाने की जरूरत है लिहाजा याची को तीन माह में एक्सग्रेशिया मुआवजे का भुगतान किया जाए।

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