सरकार शादी की तैयारियों में व्यस्त
चंडीगढ़. पंजाब सरकार आजकल शादियों में व्यस्त है। दस दिन से चंडीगढ़ स्थित राज्य सचिवालय में न मुख्यमंत्री हैं और न उपमुख्यमंत्री। ज्यादातर मंत्री राजधानी से बाहर हैं। मंत्रियों और मुख्यमंत्री के नहीं आने के कारण अधिकतर अफसर भी दफ्तरों से गायब हैं।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इजराइल में हैं जबकि उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल अपने साले और पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की शादी में व्यस्त हैं। लोक संपर्क मंत्री सेवा सिंह सेखवां की बेटी की भी वीरवार को शादी हुई है। शुक्रवार को सचिवालय में मनोरंजन कालिया, रणजीत सिंह ब्रrापुरा, गुलजार सिंह रणीके, मास्टर मोहन लाल और परमिंदर सिंह ढींडसा का दफ्तर सूना पड़ा था। पूछने पर स्टाफ ने बताया कि सभी मंत्री दिल्ली में हैं।
स्वास्थ्य मंत्री लक्ष्मीकांता चावला और शिक्षा मंत्री उपिंदरजीत कौर के स्टाफ का कहना था कि दोनों अपने विधानसभा हलकों में हैं। दूसरे मंत्री और संसदीय सचिव भी शुक्रवार को चंडीगढ़ से बाहर थे। मजीठिया की शादी को लेकर नई दिल्ली में 17 नवंबर से ही कार्यक्रम चल रहे हैं जो 21 नवंबर तक जारी रहेंगे। मजीठिया की शादी 21 नवंबर को दिल्ली में होगी।
इसकी वजह से पंजाब सरकार के ज्यादातर मंत्री, विधायक और अफसर वहीं पर व्यस्त हैं। बिक्रम सिंह मजीठिया की शादी की रिसेप्शन को लेकर 15 नवंबर को मजीठा में भी कार्यक्रम हुआ था जिसमें पूरे बादल परिवार के अलावा सरकार के ज्यादातर मंत्री, विधायक और अफसर पहुंचे थे।
कुछ और दिन चलेगा
फिलहाल मैरिज सीजन अगले कुछ और दिन जारी रहेगा। 21 नवंबर को नई दिल्ली में मजीठिया की शादी के बाद 25 नवंबर को चंडीगढ़ में रिसेप्शन का कार्यक्रम है। अन्य समारोहों में व्यस्त दूसरे मंत्री भी एक हफ्ते बाद ही चंडीगढ़ पहुंचेंगे।
घर वाले घर नहीं ते सानू..
‘घर वाले घर नहीं, ते सानू किसे दा डर नहीं।’ यह कहावत आजकल पंजाब सिविल सचिवालय के कर्मचारियों पर सटीक है। शुक्रवार को सचिवालय में एक भी मंत्री नहीं था और इसी वजह से ज्यादातर अधिकारी और कर्मचारी भी गायब थे।
लोग हो रहे हैं परेशान
लुधियाना के स्वर्ण सिंह और मोगा जिले के ढुडीके गांव के बेअंत सिंह शुक्रवार को सचिवालय के मुख्य गेट पर माथा पकड़े बैठे थे। स्वर्ण सिंह वन विभाग से संबंधित काम के सिलसिले में वनमंत्री तीक्ष्ण सूद से मिलने आए थे जबकि बेअंत सिंह को राजस्व विभाग के मंत्री अजीत सिंह कोहाड़ से काम था। उनका कहना था, ‘आज का दिन बेकार गया। अब अगले फिर आना पड़ेगा।’










