Saturday, Nov 21st, 2009, 2:56 am [IST]  

danik bhaskarबढ़ते सियासी दबाव से पुलिस अफसर खफा

सुखबीर सिंह बाजवा

चंडीगढ़. बढ़ते राजनीतिक दबाव और सरकारी काम में नेताओं के दखल से पंजाब पुलिस के अफसर तनाव में हैं। ट्रांसफर के लिए समय सीमा तय होने के बावजूद राजनेताओं के दबाव में तबादले होने से खफा आला अफसरों ने अपनी नाराजगी डीजीपी परमदीप सिंह गिल के आगे दर्ज करवा दी है।



सूत्रों के अनुसार, डीजीपी परमदीप सिंह गिल इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल के साथ बैठक करने जा रहे हैं। पिछले दिनों कुंवर विजय प्रताप सिंह को अमृतसर के एसएसपी पद से हटा दिया गया। आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह को महज भाजपा विधायक अनिल जोशी की शिकायत पर सरकार ने ‘किक’ लगाई थी। विजय प्रताप का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने शहर में जोशी के कुछ समर्थकों को होर्डिग्स लगाने से रोका था।



आखिर किसकी मानें



डीजीपी बनने के बाद परमदीप सिंह गिल ने तमाम आईजी, डीआईजी रेंज और सभी जिलों के एसएसपी को निर्देश दिए थे कि वह लोगों की शिकायतों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करें। गिल ने पद संभालने के बाद अफसरों के साथ पहली बैठक में कहा था, ‘लोगों को इंसाफ देना हर पुलिस अफसर की ड्यूटी है। शिकायतों का निपटारा मेरिट से होना चाहिए।’ फील्ड अफसर कहते हैं, ‘डीजीपी अपराधियों को नहीं बख्शने का निर्देश देते हैं और राजनेता उन्हें छोड़ने का दबाव डालते हैं। आखिर वे किसकी मानें।’



तबादला नीति को ठोस बनाने की मांग



डीजीपी परमदीप सिंह गिल पर पुलिस अफसरों व जवानों के बेवजह होने वाले तबादलों पर रोक लगाने और इस बारे में ठोस नीति बनाने का दबाव है। नियमानुसार अगर डिपार्टमेंट के किसी मुलाजिम पर भ्रष्टाचार, मानवाधिकारों के उल्लंघन या अपराधियों को सरंक्षण देने जैसे आरोप साबित नहीं होते तो उसका तबादला दो साल से पहले नहीं किया जा सकता। ये बात दूसरी है कि कई अफसरों और जवानों को दो साल में कई बार ट्रांसफर होना पड़ जाता है।



अफसरों की मांग



पुलिस अफसरों की मांग है कि अगर कोई राजनेता डिपार्टमेंट के किसी अधिकारी पर भेदभाव के आरोप लगाता है तो उसकी जांच एडीजीपी लेवल के अफसर से कराई जानी चाहिए। फील्ड में तैनात अफसरों के खिलाफ राजनेताओं की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। इनकी जांच डीजीपी ऑफिस के प्रशासनिक विंग को करनी चाहिए।




फील्ड अफसर परेशान



फील्ड में तैनात आईपीएस- पीपीएस अफसरों समेत थानों के एसएचओ तक अकाली- भाजपा गठबंधन के विधायकों के ‘उत्पीड़न’ से परेशान हैं। डीजीपी के सामने दर्ज करवाई आपत्तियों में इन अफसरों ने कहा है कि थाने में कोई केस आते ही इन विधायकों की ओर से दबाव पड़ना शुरू हो जाता है। बात नहीं मानने पर यह नेता सीधे तबादला कराने की धमकी देते हैं।

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