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Saturday, Nov 21st, 2009, 2:57 am [IST]  

danik bhaskarशिवालिक के ‘सताए’ मेयर कालिया की शरण में

नीरज मैनरा

लुधियाना. नगर निगम हद एक किलोमीटर बढ़ाने का अकाली विधायक दर्शन सिंह शिवालिक का दबाव मेयर हाकम सिंह ग्यासपुरा को परेशान कर रहा है। मेयर ने स्थानीय निकाय मंत्री मनोरंजन कालिया के सामने अपनी परेशानी को रखा और इससे ‘छुटकारा’ दिलाने का आग्रह किया है। कालिया से चर्चा से पहले मेयर ने सर्किट हाउस में सीनियर डिप्टी मेयर प्रवीण बांसल से भी इस मामले में विचार-विमर्श किया।



विधायक के इस प्रस्ताव के कारण ही मेयर को पहले भी सत्ताधारियों के साथ-साथ विपक्षी नेताओं की आलोचना झेलनी पड़ी थी। कांग्रेस पार्षदों ने तो इस प्रस्ताव को शिवालिक का निजी हित ही करार दिया था। सर्किट हाउस में मेयर ने कालिया से इस मसले पर बंद कमरे में चर्चा की। उस दौरान कुछ भाजपा नेता भी मौजूद थे।



मेयर ने कालिया से साफ कहा कि निगम का दायरा एक किलोमीटर बढ़ाने का प्रस्ताव सदन में पास करने के लिए दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कालिया से कहा कि विधायक के दबाव के कारण वे विकट स्थिति में फंसे महसूस कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि कालिया ने इस मसले पर मेयर को फिलहाल चुप्पी साधने की सलाह दी है।



यहां बता दें, निगम सीमा एक किलोमीटर बढ़ाने के लिए शिवालिक अर्से से मेयर पर दबाव बनाए हुए हैं। शिवालिक के दबाव पर मेयर ने निगम सदन की छह जुलाई को हुई जनरल मीटिंग के सप्लीमेंटरी एजेंडे में इस प्रस्ताव को शामिल किया गया था। सदन बैठक से पहले बुलाई गई आल पार्टी पार्षदों की मीटिंग में शिवालिक के प्रस्ताव को पार्षदों ने एकमत से नामंजूर कर दिया था।



उसके बावजूद सदन बैठक के सप्लीमेंटरी एजेंडे में इस प्रस्ताव को शामिल कर लिया गया था। मेयर ने आनन फानन में मूल एजेंडे समेत सप्लीमेंटरी एजेंडे के प्रस्तावों पर हामी भरवाने की कोशिश की तो पार्षदों ने हंगामा खड़ा कर दिया। उसकी वजह से कई महीनों बाद हुई सदन की बैठक महज पांच मिनट ही चल सकी। उसके बाद मेयर को विपक्षी पार्षदों के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के पार्षदों और विधायकों की आलोचना का शिकार बनना पड़ा था।



मामला जब सरकार के पहुंचा तो वहां से भी मेयर को खरी खरी सुनने को मिली थी। कालिया से मंत्रणा करने के दौरान मेयर पर शिवालिक का दबाव सिर चढ़ कर बोल रहा था। वैसे भी इस मामले को लेकर शिवालिक और मेयर के बीच तू-तू, मैं-मैं भी हो चुकी है। परेशान मेयर का कहना था कि सरकार इस मसले को अपने हाथ में लेकर उनकी जान छुड़ाए। बहरहाल, कालिया ने इस मसले पर मेयर को चुप रहने की नसीहत दी है।



प्रस्ताव को मुनासिब नहीं मानते जनप्रतिनिधि



निगम हद बढ़ाने को सीनियर डिप्टी मेयर मुनासिब नहीं मानते। उनका कहना है कि दायरा बढ़ने से उन इलाकों के विकास की जिम्मेदारी निगम पर जा आएगी। निगम हद के भीतर पहले ही कई ऐसे इलाके हैं जो विकास के अछूते हैं। नई जिम्मेदारी के साथ कई सौ करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार निगम पर पड़ेगा। भाजपा इस प्रस्ताव का पहले ही विरोध कर चुकी है।



हम अपने स्टैंड पर कायम हैं। वहीं, कांग्रेस पार्षद परमिंदर मेहता ने भी शिवालिक के प्रस्ताव को अनुचित बताया है। उनका कहना है कि पहले ही अनाधिकृत कालोनियों के विकास का बोझ निगम पर डाल दिया गया है। उसे पूरा करने के लिए ही फंड अपर्याप्त है। विधायक अगर खास इलाकों का विकास चाहते हैं तो सरकार से कह कर ही करवा सकते हैं। फिर निगम पर बोझ डालने की जरूरत ही क्या है?

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