Saturday, Nov 21st, 2009, 3:17 am [IST]  

danik bhaskarअवैध रूप से बेचे हथियार

Bhaskar News

जयपुर. राज्य के चर्चित श्रीगंगानगर हथियार प्रकरण की जांच कर रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने सेना के दो आला अफसरों को सीधे तौर पर दोषी माना है, जबकि तीन अन्य अफसरों को भी संदिग्ध मानते हुए उनके खिलाफ आर्मी हैड क्वार्टर से विभागीय कार्रवाई के लिए कहा है। जांच अधिकारी ने यह रिपोर्ट एसीबी मुख्यालय को सौंपी है।



श्रीगंगानगर हथियार प्रकरण को लेकर एसीबी के अलावा, राज्य की एसओजी और सेना भी अपने स्तर पर जांच कर रही है। हथियार प्रकरण में श्रीगंगानगर के तत्कालीन एडीएम लालचंद ओझा समेत कई लोगांे पर पहले ही निलंबन की गाज गिर चुकी है। श्रीगंगानगर हथियार प्रकरण को लेकर एसीबी की ओर से 2 जुलाई 08 को दर्ज किए गए मुकदमे की जांच एसीबी के उपाधीक्षक कर रहे हैं।



इंवेस्टिगेशन ऑफिसर की रिपोर्ट के मुताबिक दो लेफ्टिनेट कर्नल ने मिलकर जनवरी-फरवरी 07 में गैर कानूनी तरीके से सेना के हथियार प्राइवेट लोगों को ऊंचे दामों पर बेचे थे। आर्मी के इन दोनों अफसरों ने श्रीगंगानगर के तत्कालीन एडीएम लालचंद ओझा से सांठगांठ करके सेना के हथियारों की खरीद-फरोख्त के वेरीफिकेशन कराए। दोनों अफसरों ने व्यक्तिगत जरूरत बताकर आर्मी के साथी अफसरों से सस्ते दामों पर 7.62 एमएम के पिस्टल खरीदे थे। खरीदारों को इन दोनों अफसरों ने अपने उद्देश्यों के बारे में नहीं बताया। हथियार को बेचने में आर्मी अफसरों की एडीएम लालचंद ओझा ने पूरी मदद की।



प्रकरण की जांच रिपोर्ट एसीबी मुख्यालय को भेज दी है। दो अफसरों को दोषी पाया है। साथ ही तीन अफसरों पर विभागीय कार्रवाई करने के लिए आर्मी हैड क्वार्टर को लिखने की सिफारिश की है।

- प्रदीप कुमार मोगा, जांच अधिकारी (एसीबी)



बड़ी गलती



तीन अन्य अफसरों ने भी की गड़बड़ी



एसीबी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक तीन अन्य सैन्य अफसरों ने भी सेना से मिले पिस्टल को बाजार में प्राइवेट लोगों को बेच दिया था। इन्होंने सेना से मिले 7.62 एमएम के पिस्टल को बेचने से पहले स्टैंडिंग अलॉटमेंट कमेटी आर्मी ऑर्डीनेस से इजाजत नहीं ली थी।



सेना के नियमों के मुताबिक हथियार को किसी दूसरे को बेचने से पहले इस आर्मी ऑर्डीनेस कमेटी से इजाजत लिया जाना जरूरी है। एसीबी के इंवेस्टिगेशन ऑफिसर ने अपनी जांच में सिफारिश की कि सेना मुख्यालय इस पर तुरंत कार्रवाई करे।

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