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Saturday, Nov 21st, 2009, 3:52 am [IST]  

danik bhaskar...तो कोर्ट में लेना पड़ेगा ड्राफ्ट

महेन्द्र पाल गुप्त

अमृतसर. नोटिस की अवधि में भेजे गए ड्राफ्ट की वसूली से मुद्दई पक्ष के इंकार पर बचाव पक्ष के वकील द्वारा दोबारा ड्राफ्ट देने पर स्पैशल जज गुरनाम सिंह की अदालत ने चैक बाऊंस मामले को खारिज कर दिया। हैरत की बात है कि मामला दायर होने से पहले दोनों पक्षों के वकीलों ने एक-दूसरे पर लीगल नोटिस के लिफाफे में कोरा कागज भेजने के क्रास नोटिस भेजे थे।



रोज एवेन्यू निवासी मीनू महिन्द्रू और अमित महेन्द्रू के अटार्नी ललित महेन्द्रू ने जज नगर, बटाला रोड स्थित फर्म मल्टीविजन कंप्यूटर की मालिक सिम्मी मित्तल के खिलाफ चैक बाऊंस का मामला दायर किया था। उसका कहना था कि आरोपी फर्म ने उनसे लारैंस रोड, नेहरू कांप्लैक्स स्थित उनकी दुकान किराए पर ली थी। इसका वर्तमान किराया 19,800 रुपए था।



अप्रैल, 09 के किराए के तौर पर आरोपी ने 19,800 का एक चैक 14 अप्रैल के लिए जारी किया था। जो दो बार बाऊंस होने पर आरोपी फर्म को 15 दिनों का लीगल नोटिस भेजा गया। इसके बावजूद आरोपी फर्म ने भुगतान नहीं किया। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील संदीप वालिया का कहना था कि मुद्दई पक्ष ने मामला दायर करने से पहले उनके मुवक्किल को लीगल नोटिस भेजा था।



नोटिस अवधि के दौरान ही उन्होंने स्पीड पोस्ट के जरिए नोटिस के जवाब के साथ 19,800 का ड्राफ्ट भेज दिया। मुद्दई पक्ष ने ड्राफ्ट लेने के बावजूद मामला दायर किया है। मुद्दई पक्ष का कहना था कि आरोपी फर्म ने उन्हें कोई ड्राफ्ट नहीं भेजा। इसपर बचाव पक्ष ने अदालत में दोबारा ड्राफ्ट देने की पेशकश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।



अदालत में नया ड्राफ्ट जमा कराने पर जहां अदालत ने बचाव पक्ष को पहला ड्राफ्ट कैंसिल कराने का सुझाव दिया, वहीं अपने फैसले में कहा कि मुद्दई पक्ष से उचित रसीद लेकर उसे ड्राफ्ट दिया जाए। इसका अभिप्राय है कि मुद्दई पक्ष को ड्राफ्ट लेने के लिए अदालत को रसीद जारी करनी पड़ेगी।

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