दूषित पानी से नहीं हुई कोई मौत!
जयपुर. शहर में दूषित पानी से कोई मौत नहीं हुई है। अस्पताल से मिली रिपोर्ट से पता चला है कि बच्चों ने किन्हीं अन्य कारणों से दम तोड़ा है। यह जवाब राज्य सरकार ने दूषित पानी से हुई मौतों पर हाईकोर्ट की ओर से लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान के मामले में शुक्रवार को पेश किया।
दूषित पानी के सैंपल लेने की व्यवस्था के संबंध में सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि सैंपल मोबाइल वैन के जरिए लिए जाते हैं, यदि कहीं दूषित पानी की आपूर्ति का पता चलता है तो पाइप लाइन सुधारने के साथ स्वच्छ पानी की व्यवस्था की जाती है। 90 फीसदी पाइप लाइन बदल दी गई हैं और बाकी का काम जारी है। सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया कि बीसलपुर परियोजना की प्राथमिकता जयपुर सहित अजमेर जिले को पानी की आपूर्ति करना है।
रामगढ़ बांध के संबंध में राज्य सरकार ने बताया कि पिछले सात सालों से बांध में पानी नहीं आया है, इसलिए बांध से पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। पाइप लाइनों में लीकेज सुधारने के बारे में भी सरकार ने सफाई पेश की। मालूम हो कि शहर में पिछले दिनों हुई मौतों पर हाईकोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया था।
सम्मन नहीं पत्र भेजा
न्यायाधीश माथुर आयोग ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में पेश किए गए जवाब में बताया गया है कि वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में भूमि आवंटन सहित अन्य निर्णयों के बारे में पूछताछ के लिए अफसरों व अन्य को सम्मन नहीं केवल पत्र जारी किए है। आयोग ने जवाब में बताया है कि पत्र में नम्र भाषा उपयोग में ली गई है। किन्ही निर्णयों के संबंध में अफसरों को व्यक्तिगत रूप से भी तलब किया गया है।
अवैध बस संचालन पर कर रहे हैं कार्रवाई
इधर, निजी बसों के अवैध संचालन के संबंध में दिए जवाब में सरकार ने कहा है कि बसों का अवैध संचालन रोकने के लिए कार्रवाई जारी है। नो पार्किग जोन मे खड़ी बसों को सीज किया जा रहा है। सिंधी कैम्प बस स्टैंड पर अवैध पार्किग रोकने के लिए क्लोज सर्कि ट टीवी भी लगाया गया है।










