सरकार ने माना डेंगू-मलेरिया से हुई मौत
भोपाल. स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा ने शुक्रवार को विधानसभा में स्वीकार किया कि बीते चार माह में प्रदेश में डेंगू से 86 और मलेरिया से दो मौतें हुई हैं। प्रदेश में इस दौरान स्वाइन फ्लू से कोई मौत नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के अस्पतालों में पीसीसी, फेरेसिस मशीनें लगाने और आइसोलेशन वार्ड सहित वेंटीलेटर का इंतजाम किया जा रहा है।
एक माह के भीतर सभी जिला अस्पतालों में इमरजेंसी व्यवस्था कायम कर दी जाएगी। मंत्री से लेकर उपसंचालक तक को जिलों की जिम्मेदारी दी जा रही है। यह मामला कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत और चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने ध्यानकर्षण सूचना के जरिए उठाया था। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में इस दौरान डेंगू के 1200 और मलेरिया के 65 हजार 400 सेंपल पॉजीटिव पाए गए थे। डेंगू से भोपाल संभाग में 37 मौतें दर्ज हुई थीं। प्रदेश में डेंगू से हुई कुल 86 मौतें रोगियों की संख्या का 1.7 प्रतिशत है। सरकार ने उपचार और ऐहितयात के प्रभावी उपाय किए हैं, यही वजह है कि अगस्त में 41 जिलों में डेंगू का प्रकोप था, नवंबर में केवल 12 जिलों में ही डेंगू के मामले सामने आए हैं।
पूरक प्रश्नों के उत्तर में श्री मिश्रा ने बताया कि जिलों में प्लेटलेट्स निकालने की व्यवस्था की जा रही है। जिलावार जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इसमें मंत्री, राज्य मंत्री, प्रमुख सचिव, सचिव, संचालक, संयुक्त संचालक, उपसंचालक तक को शामिल किया जाएगा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टॉफ की कमी दूर की जाएगी। कांग्रेस विधायक श्री चतुर्वेदी ने कहा कि डेंगू में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था न हो पाने से लोगों की मौतें हुई हैं। भाजपा विधायक श्रीमती विनोद पंथी की भतीजी और स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा के पीए श्रोती की भी इसी वजह से असमय मृत्यु हुई। उन्होंने सुझाव दिया कि जिलों में पदस्थ सीएमएचओ को हर हफ्ते दो-तीन ग्रामीण क्षेत्रों में दौरे अनिवार्य रूप से करने को कहा जाए। मंत्री ने इस सुझाव का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्था कर दी जाएगी।
दूषित जल से मृत्यु के मामले में दी जाएगी आथिर्क सहायता
श्री मिश्रा ने कांग्रेस विधायक नर्मदा प्रसाद प्रजापति के ध्यानाकर्षण और पूरक प्रश्नों के उत्तर में आश्वासन दिया कि नरसिंहपुर जिले में दूषित पेयजल से हुई मौतों के मामले में सरकार मुख्यमंत्री कोष से आर्थिक सहायता देगी। श्री प्रजापति का कहना था कि सरकार तीन मौतें स्वीकार कर रही है, जबकि पांच अन्य मौतें भी हुई थीं। लोगों को पर्याप्त इलाज नहीं मिला। 60 मरीज नरसिंहपुर से खुद जबलपुर इलाज के लिए पहुंचे। इर्न ईट भट्टा मजदूरों के पास गरीबी रेखा के कार्ड तक नहीं हैं।










