Saturday, Nov 21st, 2009, 4:14 am [IST]  

danik bhaskarकॉल डिटेल्स की जांच नहीं की, उलझी पुलिस

भास्कर न्यूज

भोपाल. राजधानी पुलिस प्रॉपर्टी डीलर जयप्रकाश आत्महत्या मामले में उलझती नजर आ रही है। उत्तरप्रदेश से यहां आकर प्राइवेट नौकरी करने वाले जेपी के पास पिछले छह सालों में 22 गाड़ियां थीं। काफी कम समय में करोड़पति बने जेपी के हाईप्रोफाइल लोगों से संबंध होने की वजह से पुलिस भी इस मामले में गहराई से हाथ डालने में कतरा रही है।



सूत्रों की मानें तो इस मामले में कुछ नेताओं और अफसरों को बचाने का पुलिस पर दबाव है। पुलिस ने अब तक जेपी के मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच नहीं की है। यह बात भी सामने आ रही है कि कहीं जेपी पर उन लोगों का दबाव तो नहीं था, जिनका पैसा उसने निवेश कर रखा था। अब आला अफसर इस बात की जांच करा रहे हैं कि जेपी को पैसा देने वालों ने ही तो उस पर दबाव नहीं बनाया था और संरक्षकों से परेशान जेपी ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में राजधानी के एक बिल्डर, एक नेता और एक अफसर की भूमिका पर उंगली उठ रही है।



चार आरोपियों की जमानत नामंजूर



इस मामले में जेल गए चार आरोपियों की जमानत अर्जी सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को नामंजूर कर दी। इन पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज है। अपर सत्र न्यायाधीश नीना आशापुरे की अदालत में आरोपियों की जमानत अर्जी पर बहस हुई। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे नामंजूर कर दिया। गौरतलब है कि जयप्रकाश सिंह द्वारा छोड़े गए पत्र के आधार शराब माफिया विनय केडिया के चार साथियों शौकत अली, मोहम्मद कामरान, नवीनभाई पटेल और नीरज उर्फ आशू सिंह पवार को गिरफ्तार कर पुलिस ने 16 नवंबर को मजिस्ट्रेट तृप्ति शर्मा की अदालत में पेश किया था। उन्हें 30 नवंबर तक जेल भेजा गया था। उधर, अन्य आरोपियों की तलाश में कई जगह छापे भी मारे गए।



कुमार सहित अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस ने शुक्रवार को भी कई जगहों पर छापे मारे। संबंध होने की वजह से पुलिस भी इस मामले में गहराई से हाथ डालने में कतरा रही है। सूत्रों की मानें तो इस मामले में कुछ नेताओं और अफसरों को बचाने का पुलिस पर दबाव है। पुलिस ने अब तक जेपी के मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच नहीं की है। यह बात भी सामने आ रही है कि कहीं जेपी पर उन लोगों का दबाव तो नहीं था, जिनका पैसा उसने निवेश कर रखा था। अब आला अफसर इस बात की जांच करा रहे हैं कि जेपी को पैसा देने वालों ने ही तो उस पर दबाव नहीं बनाया था और संरक्षकों से परेशान जेपी ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में राजधानी के एक बिल्डर, एक नेता और एक अफसर की भूमिका पर उंगली उठ रही है।

चार आरोपियों की जमानत नामंजूर



इस मामले में जेल गए चार आरोपियों की जमानत अर्जी सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को नामंजूर कर दी। इन पर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का मामला दर्ज है। अपर सत्र न्यायाधीश नीना आशापुरे की अदालत में आरोपियों की जमानत अर्जी पर बहस हुई। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे नामंजूर कर दिया। गौरतलब है कि जयप्रकाश सिंह द्वारा छोड़े गए पत्र के आधार शराब माफिया विनय केडिया के चार साथियों शौकत अली, मोहम्मद कामरान, नवीनभाई पटेल और नीरज उर्फ आशू सिंह पवार को गिरफ्तार कर पुलिस ने 16 नवंबर को मजिस्ट्रेट तृप्ति शर्मा की अदालत में पेश किया था। उन्हें 30 नवंबर तक जेल भेजा गया था। उधर, अन्य आरोपियों की तलाश में कई जगह छापे भी मारे गए। कुमार सहित अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस ने शुक्रवार को भी कई जगहों पर छापे मारे।

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