एक लाख डीलरों को नोटिस
जालंधर. टैक्स क्लैक्शन बढ़ाने में जुटी पंजाब सरकार के निर्देश पर टैक्सेशन विभाग ने राज्य के करीब एक लाख डीलरों को वैल्यु एडिड टैक्स (वैट) 2005 की धारा-29 के तहत नोटिस जारी किए हैं। वर्ष 2005-06 से संबंधित नोटिस के तहत संभावित चोरी, रिटर्न न भरने या फिर उसमें गलत जानकारी देने, अवैध आईटीसी लेने की आशंका के चलते डीलरों के कारोबार की असैस्मैंट की जाएगी।
असैस्मैंट का समय सप्ताह भर का ही दिया गया है। वार्षिक रिटर्न का जोर और ऊपर से असैस्मैंट की तलवार से डीलरों के समक्ष नई परेशानी खड़ी हो गई है। तीन साल की अवधि के बाद होने वाली असैस्मैंट को विभाग अधिकारी कानूनी बता रहे हैं, जबकि टैक्सेशन एक्सपर्ट का कहना है कि यह टैक्सेशन ट्रिब्यूनल की ओर से 11 जून 09 को फिरोजपुर ट्रेडिंग कंपनी बनाम पंजाब सरकार नामक केस में दिए फैसले की अनदेखी है।
उधर, कमिश्नर ए. वेणुप्रसाद का कहना है कि नोटिस नियमानुसार जारी है। डीलरों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो इसलिए डिवीजनल डीईटीसीज को असैस्मैंट प्रक्रिया पर पूरी नजर रखने की हिदायत दी गई है।
गलत ढंग से जारी हुए नोटिस : बेदी
वकील जे.एस. बेदी ने कहा कि वैट की धारा-29 के तहत विभाग को तीन साल के भीतर असैस्मैंट करने का अधिकार है और नोटिस भी नियम 47 के तहत कम से कम 10 दिन पहले देना जरूरी है। चूंकि 20 नवंबर को तीन साल पूरे हो गए और इसके बाद डीलर की असैस्मैंट करने के लिए धारा-29 (4) के तहत एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर, पंजाब से लिखित में एक्सटैंशन लेना जरूरी है।
विभाग ने सभी केसों पर एक ही एक्सटैंशन दी है जबकि यह प्रत्येक केस में अलग-अलग देने का नियम है। एक्सटैंशन बारे डीलर को नोटिस से पहले सूचित करना था ताकि वह उसे चैलेंज करके अपने अधिकार का उपयोग कर सकें।










