Saturday, Nov 21st, 2009, 4:58 am [IST]  

danik bhaskarफरियादियों को देना होगा आरोपी का जेल खर्च

मांगीलाल चौहान

इंदौर. अपने बकाया भुगतान के लिए लड़ाई लड़ रहे सपनि के दो कर्मचारियों को अपने अफसर को जेल भिजवाने के एवज में उसका जेल खर्च उठाना होगा। यह अनोखा आदेश दिया है इंदौर के श्रम न्यायालय ने। मामला मप्र सड़क परिवहन निगम के इंदौर संभागीय प्रबंधक उपेंद्रकुमार त्रिवेदी से जुड़ा है।



श्रम न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने निर्देशित किया कि जितने दिन वे जेल में रहेंगे, उतने दिन का जेल खर्च चुकाना होगा यह भत्ता फरियादियों को भुगतना होगा। सपनि से निकाले गए अशोककुमार वर्मा एवं अशोक बिहारी सक्सेना के प्रकरण लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन थे।



न्यायालय ने सपनि को इनके बकाया भुगतान का आदेश दिया था किंतु सपनि ने फैसले को औद्योगिक न्यायालय में चुनौती दी। अपील खारिज होने पर सपनि ने हाई कोर्ट की भी शरण ली किंतु अपील खारिज हो गई। इसके बाद दोनों कर्मचारियों को 20-20 हजार रुपए का ही भुगतान किया गया। शेष पैसा रोक लिया। इस पर दोनों कर्मियों की ओर से अधिवक्ता ब्रजमोहन गेहलोत ने श्रम न्यायालय में वाद दायर किया था।



क्या होता है जेल भत्ता



जेल में रहने वाले कैदियों पर शासन द्वारा खाने आदि का खर्च किया जाता है। जेल प्रशासन के मुताबिक एक कैदी के खाने पर 25 रुपए रोज खर्च होता है। न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले के परिप्रेक्ष्य में फरियादी दोनों कर्मचारियों से कैदी के खाने के 25 रुपए रोज के अलावा डेढ़ रुपए सफाई और एक रुपया दवाई खर्च वसूला जाएगा।



क्या है प्रकरण



प्रकरण एक- रापनि से हटाए गए अशोक वर्मा द्वारा मप्र औद्योगिक संबंध अधिनियम की धारा 108 के तहत दायर प्रकरण पर श्रम न्यायालय ने 50 प्रतिशत पिछले वेतन सहित पुन: सेवा में लेने के आदेश दिए थे। सपनि ने आदेश के खिलाफ औद्योगिक न्यायालय में चुनौती दी थी जो खारिज हो गई। बाद में श्रम न्यायालय ने निर्णय पारित किया कि कर्मचारी को पिछले वेतन के 1,56,558 रुपए का भुगतान किया जाए किंतु सपनि ने मात्र 20 हजार रुपए का ही भुगतान किया और शेष रुपए अब तक बकाया हैं।

प्रकरण दो- अशोक सक्सेना द्वारा प्रस्तुत प्रकरण में आदेश दिया था कि प्रार्थी के पिछले वेतन वेतन के 1,24,672 रुपए का भुगतान किया जाए। रापनि ने इस आदेश के खिलाफ भी औद्योगिक न्यायालय में चुनौती दी जो खारिज हो गई। इस पर रापनि ने मात्र 20 हजार रुपए का भुगतान किया और शेष 1,04,672 रुपए अभी भी बकाया है।

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