सूने हैं ‘स्वागत’ कक्ष
रतलाम. पुलिसकर्मियों का आमजनता के साथ खराब आचरण व आए दिन मिलने वाली शिकायतों से छुटकारा पाने के लिए मुख्यालय के निर्देश पर स्वागत कक्ष तो बन गए लेकिन यह कक्ष आज ‘सन्नाटा’ कक्ष में ही बदलकर रह गए हैं। मुख्यालय से पुलिसकर्मियों को पढ़ाया गया शिष्टाचार व आदर का पाठ छह माह के भीतर भूल गए हैं।
शहर के थानों में स्वागत कक्ष सिर्फ नाम के लिए हैं बाकी तो थानों पर पुराने र्ढे से ही काम जारी हैं। जून में डीजीपी एस.के. राउत ने प्रदेश के सभी थानों में स्वागत कक्ष बनाने के साथ ही शिकायतकर्ता के बैठने के लिए सुसज्जित टेबल-कुर्सी लगाने के निर्देश दिए थे।
इसमें स्पष्ट किया गया कि कोई भी व्यक्ति थाने आए तो उसके साथ ऐसा व्यवहार होना चाहिए जैसा कि घर पर आए मेहमान का होता है। इसी ध्येय के साथ थानों में बने स्वागत कक्षों में रंगरोगन की चमक बिखरी हुई है लेकिन डीजीपी के उद्देश्य को तो पुलिसकर्मियों ने ताक में रख छोड़ा है।
भोपाल में बना था पहला स्वागत कक्ष- डीजीपी श्री राउत किसी भी नियम को लागू करने से पहले मुख्यालय के एक थाने पर उसे चलाकर देखते हैं और उसके परिणाम देखने के बाद प्रदेश के सभी थानों पर उसे लागू करने के निर्देश देते हैं। प्रदेश में पहला स्वागत कक्ष जून में भोपाल में बनाया गया था। अच्छे रिजल्ट मिलने तथा आमजन की व्यवस्थित सुनवाई होने पर इस व्यवस्था को प्रदेशभर में लागू किया गया था।
स्टेशन रोड थाना
खाली रहती है कुर्सी - स्वागत कक्ष में सन्नाटा पसरा था। बेटे के साथ एक महिला स्वागत कक्ष पहुंचती है। कक्ष में रोज की तरह कोई भी सीट पर नहीं है। मोबाइल फोन गुम होने की शिकायत करने थाने पहुंची महिला ने कुछ देर बैठकर इंतजार करना मुनासिब समझा जब किसी ने स्वागत कक्ष की ओर झांकना मुनासीब नहीं समझा तो उसने एक के बाद दूसरे और फिर तीसरे पुलिसकर्मी को आपबीती बताने का प्रयास करले लगी। जब किसी ने ध्यान नहीं दिया तो थकहार कर थाने के भीतर ही दूसरी ओर फाइल में लिखा पढ़ी कर रहे दीवान को जाकर घटनाक्रम बताया।
माणकचौक थाना
लगते हैं सिगरेट के कश - माणकचौक थाना में औपचारिकता के नाम पोर्च की दीवार पर बोर्ड टांगकर टेबल-कुर्सी रख दी गई है। नाममात्र के बने इस स्वागत कक्ष की कुर्सी पर अब तक एक भी जिम्मेदार बैठा हुआ नहीं दिखाई दिया जिसने किसी पीड़ित को पानी पिलाया हो या फिर किसी शख्स की शिकायत सुनी गई हो। थाने के एक कोने में लगी टेबल कुर्सी पर पुलिसकर्मी जरूर लुमट कर बैठे और सिगरेट व बीड़ी के कश लगाते हुए मिल जाएंगे।
औद्योगिक पुलिस थाना
आनाकानी के साथ स्वागत - स्टेशन रोड थाना व माणकचौक पुलिस थाने की तरह औद्योगिक पुलिस थाने में भी स्वागत कक्ष नाममात्र का बना हुआ है। थाने में अगर किसी को अपनी पीड़ा का दर्द सुनाना हो या फिर शिकायत दर्ज करान हो तो पहले तो आनाकानी होगी और उसके बाद संबंधित बीट वाले का नाम बताकर कोने में बैठा दिया जाएगा। बीट वाले पुलिसकर्मी जब आते हैं तो वे शिकायत के नाम पर आवेदन लेकर इतिश्री कर लेते हैं।










