Saturday, Nov 21st, 2009, 6:34 am [IST]  

danik bhaskarभटकते रहे मुसाफिर

भास्कर न्यूज

बिलासपुर. नक्सलियों की दहशतगर्दी से लाइफ लाइन कहलाने वाली रेल यातायात इस तरह प्रभावित हुई कि जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मंजिल तक पहुंचने के लिए लोगों को परेशान होना पड़ा या फिर यात्रा ही रद्द करनी पड़ी। इस घटना से नक्सली भले ही उत्साहित हों, लेकिन आम जनता उन्हें आतंकवादी की संज्ञा दे रहे हैं।



पटरी पर ब्लास्ट और ट्रेन को दुर्घटनाग्रस्त कर हजारों की जान लेने की कोशिश से नक्सलियों का वास्तविक चेहरा सामने आया है। इस घटना के बाद लोगों को यह कहने में थोड़ी भी हिचक नहीं है कि नक्सली आतंकवादी का रूप ले चुके हैं और उनके निशाने पर आम जनता है।



दैनिक भास्कर ने बाधित रेल यातायात से हलाकान मुसाफिरों से बात की और उनकी मन:स्थिति को जानने की कोशिश की। कुर्ला एक्सप्रेस के इंतजार कर रहे रमेश कुमार ने बताया कि उन्हें इंटव्यू के लिए नागपुर जाना था। ट्रेन के 15 घंटे लेट होने से उन्हें यात्रा तो रद्द करनी ही पड़ी, वे इंटरव्यू में भी शामिल नहीं हो सके। रमेश ने नक्सली घटना की कड़ी निंदा करते हुए नक्सलियों से सख्ती के साथ निपटने की मांग राज्य सरकारों से की।



मेल और आजाद हिंद एक्सप्रेस के इंतजार में खड़ी सुलेखा भौमिक और सुमन धारा मुंबई और पुणो तक का सफर करना था। दोनों ट्रेनें 12-12 घंटे लेट से चल रहीं थी, नतीजतन इन्हें भी यात्रा रद्द करनी पड़ी। इन छात्राओं ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि नक्सली जनता के लिए लड़ाई लड़ने की बात करते हैं।



इस घटना से सरकार ही नहीं आम जनता को भी समझ जाना चाहिए कि नक्सली स्वार्थ की लड़ाई लड़ रहे हैं और आतंक फैलाने को अपनी जीत मान रहे हैं। राज्य और केंद्र सरकार को नक्सलियों को नेस्तनाबूत करने के लिए अभियान छेड़ा जाना चाहिए। बहरहाल नक्सली ब्लास्ट और पैसेंजर के दुर्घटनाग्रस्त होने से उत्साहित भले हों, लेकिन आम जनता के बीच उनका चेहरा कुरूप ही नजर आ रहा है।



हलाकान हुए मुसाफिर: रात 9:20 पर टाटा-बिलासपुर पैसेंजर के दुर्घटनाग्रस्त होते ही रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। बिलासपुर के पड़ोसी मंडल में घटना घटने एसईसीआर के अधिकारियों की नीदें उड़ र्गई। थोड़ी देर बाद बिलासपुर से हावड़ा की ओर जाने वाली कुर्ला, अहमदाबाद, गीतांजलि एक्सप्रेस को कंट्रोल करने की रणनीति बनने लगी। कुर्ला एक्सप्रेस रायगढ़, अहमदाबाद को चांपा और गीतांजलि एक्सप्रेस को बिलासपुर स्टेशन में 3-3 घंटे कंट्रोल किया गया। इसी तरह ट्रेनों को आगे स्टेशनों में रोकते हुए परिवर्तित मार्ग से 8-8 घंटे पर गंतव्य तक पहुंचाया गया।



यात्रियों के असल परेशानी शुक्रवार की सुबह शुरू हुई। यात्रा के लिए ठिठुरन भरी सुबह में रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्री पूछताछ काउंटर के बोर्ड को देखकर चौक गए। सुबह के समय आने वाली अप कुर्ला, आजादहिंद, मेल, अहमदाबाद एक्सप्रेस अनिश्चितकालीन विलंब से चल रहीं थी। यात्री इंतजार करने लगे, लेकिन लेट-लतीफी का दौर जारी रहा। ट्रेनें 12-12 घंटे लेट चलने की सूचना आने लगी, अंतत: यात्रियों को यात्रा रद्द करनी पड़ी। कई यात्री मजबूरीवश ट्रेन का इंतजार करते रहे और सुबह के बजाय शाम में यात्रा शुरू की।



सुबह 6 बजे से 11 बजे के बीच भीड़ के कारण रेलवे स्टेशन में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। हताश यात्री धीरे-धीरे घर वापसी करने लगे। रिजर्वेशन काउंटर से 300 यात्रियों के द्वारा टिकट वापस करने की सूचना है।
..इसलिए हुई लेट: ब्लास्ट से पटरी उड़ाए जाने के बाद हावड़ा-मुंबई मेन लाइन पर यातायात पूर्णत: ठप था। ऐसे में अप-डाउन दोनों रूट की ट्रेनों को राउरकेला, मूरी, चांडिल, टाटा होते हुए गंतव्य तक पहुंचाया गया। परिवर्तित मार्ग से चलने के कारण राउरकेला से टाटानगर के बीच ट्रेनों की आवाजाही ठप रही।

  share
apne vichaar
post a comment
name:
email:
select your language:     Hindi Roman     Hindi Phonetic     English
comment:
code: