Saturday, Nov 21st, 2009, 6:36 am [IST]  

danik bhaskarचुनाव के बाद बढ़ेंगे टैक्स

भास्कर न्यूज

बिलासपुर. नगरीय प्रशासन विभाग के प्रस्तावों पर राज्य शासन ने अमल किया तो चुनाव के बाद लोगों को संपत्ति, जलकर और भवन लाइसेंस की बढ़ी हुई दरों का कड़वा घूंट पीना पड़ेगा। शुक्रवार को राजधानी रायपुर में नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा बैठक नगरीय निकायों को सक्षम बनाने की चिंता में बीती।




महक मे के प्रमुख सचिव विवेक ढांढ द्वारा 18 नवंबर को प्रदेश भर के नगर निगम कमिश्नर व अन्य अधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन यह 20 नवंबर के लिए टाल दी गई। आज की बैठक के एजेंडा का प्रमुख बिन्दु नगरीय निकायों की राजस्व में बढ़ोतरी पर केंद्रित रहा। बिलासपुर नगर निगम के कमिश्नर मुकेश बंसल एवं डिप्टी कमिश्नर अशोक शर्मा सहित अन्य जिलों के नगर निगम कमिश्नर व अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।



बैठक में संपत्ति कर की प्रचलित दर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन इसका फाइनल ड्राफ्ट संभवत: नगरीय निकाय के चुनाव के बाद ही आएगा, तब इसे लागू किया जाएगा। फि लहाल संपत्ति कर स्वनिर्धारण के आधार पर जमा कराया जाता है। इससे नगर निगम को बहुत कम राजस्व प्राप्त होता है। सुझाव है कि संपत्ति कर अलग-अलग स्लैब में लगाया जाए। तीन स्लैब में 6, 10, 15 एवं 30 फीसदी संपत्ति कर लागू किया जा सकता है।



वार्डो में भूमि की कीमत के आधार पर तथा कलेक्टर रेट के हिसाब से संपत्ति कर का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। इसी प्रकार बार लाइसेंस का कमर्शियल आधार पर एसेसमेंट किया जाए तो नगर निगम को अधिक राजस्व प्राप्त होगा। इसी प्रकार बिल्डिंग परमिशन की दर, जलकर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।



होर्डिग के लिए नई पालिसी निर्धारित करने पर बैठक में खास चर्चा की गई। इसमें संवेदनशील एवं वीआईपी मार्गो को होर्डिग के लिए प्रतिबंधित करने के साथ ही अन्य मार्गो पर फ्लेक्स, बिजली खम्भे पर लगाए जाने वाले होर्डिग के लिए दरें निर्धारित की जाएगी। संपत्ति कर के दायरे में अभी शैक्षणिक संस्थाओं को मुक्त किया गया है,परंतु सुझाव आया है कि कालेज संचालकों पर कर आरोपित करना चाहिए।



निगम कर्मचारियों ने राज्य सरकार के कर्मचारियों की भांति छठवां वेतनमान देने की मांग करते हुए लंबा आंदोलन किया। सरकार ने उनकी मांग मानते हुए यह शर्त रखी कि जिन निगमों का स्थापना व्यय 65 फीसदी से कम होगा, उन्हें ही छठे वेतनमान का लाभ दिया जाएगा। इस दायरे में किसी भी निगम के आने की संभावना नहीं है।



ऐसे हुई हालत खस्ता: ऐसे हालात क्यों बने? जानकारों के अनुसार अविभिाजित मध्यप्रदेश के समय श्यामाचरण शुक्ल के मुख्यमंत्रित्व काल में निगमों से आय के स्रोत छीन लिए गए। इनमें आक्ट्रॉय (चुंगीकर), यात्रीकर, आबकारी कर, इंट्रीकर आदि शामिल हैं। अनुमान है कि इन करों से ही रायपुर निगम करीब 400 करोड़ रुपए सालाना राजस्व प्राप्त कर सकती है। निगमों को सरकार की ओर से अनुदान दिया जाता है उसमें राज्य विभाजन के बाद भी इजाफा नहीं किया गया, जबकि नए निगम भी बने। बिलासपुर सहित पुराने निगमों की सीमा में काफी बढ़ोतरी हुई। महाराष्ट्र अन्य राज्यों में आय के स्रोत नहीं छीनने से निगमों की वहां की सरकार पर निर्भरता नहीं है।

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