Saturday, Nov 21st, 2009, 6:43 am [IST]  

danik bhaskarनिर्दलीयों की दमदार उपस्थिति से अधिकृत उम्मीदवार परेशानी में

bhaskar correspondent

श्रीगंगानगर. नगर परिषद चुनावों में निर्दलीयों की दमदार उपस्थिति से अधिकृत उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ा दी है। नगरीय निकाय चुनावों में केवल दो दिन शेष हैं और अब तक जो रुझान प्राप्त हो रहे हैं, उससे एक बार फिर नए बोर्ड में निर्दलीयों का बोलबाला रहने की संभावना है।



कांग्रेस और भाजपा में सभापति से लेकर पार्षद तक के लिए टिकट वितरण में भाई-भतीजा वाद के आरोपों के चलते निर्दलीयों की बड़ी फौज मैदान में है। अधिकृत उम्मीदवारों को सबसे अधिक चुनौती बागियों से ही मिल रही है। बागियों और अधिकृत प्रत्याशियों के बीच मत विभाजन के चलते विरोधी दलों या अन्य सशक्त निर्दलीयों की जीत की अधिक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं।



कांग्रेस में चुनाव प्रचार की कमान अब राज्य मंत्री गुरमीतसिंह कुन्नर ने संभाल रखी है, जो स्वयं कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव जीते और फिर मंत्री बने। कुन्नर की सदस्यता अभी तक कांग्रेस ने बहाल नहीं की है। राज्य सरकार में निर्दलीयों की पूछ के चलते पहले से ही दमदार चुनौती पेश कर रहे निर्दलीय प्रत्याशियों की स्थिति और मजबूत होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।



इसी भावना के चलते शहर के कई हिस्सों में निर्दलीयों के प्रति रुझान देखने को मिल रहा है और यह माना जा रहा है कि नए बोर्ड में भी सत्ता का संतुलन निर्दलीयों के हाथ में रहेगा। पिछले नगर परिषद बोर्ड (२क्क्४ से २क्क्९) में भी निर्दलीयों की महत्वपूर्ण भूमिका रही और वे भाजपा के श्याम धारीवाल और फिर कांग्रेस के यशपाल कलेर के कार्यकाल के दौरान भी पार्टी पार्षदों से अधिक प्रभावशाली रहे।

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