मच्छरों से मुक्ति दिलाएगा सी-21
ग्वालियर. दस सालों की गहन रिसर्च के बाद ग्वालियर के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीई)ने एक ऐसा रसायन तैयार कर लिया है जिससे बीमारी फैलाने वाले मच्छरों से छुटकारा पाया जा सकेगा। वैज्ञानिकों ने इस रसायन को सी-21 नाम दिया है और उनका दावा है कि मच्छरों को जन्म के साथ ही नष्ट कर देने वाला यह रसायन विश्व में पहली बार तैयार हुआ है।
रसायन की रिसर्च रिपोर्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जा रही है। इसके साथ ही इसके उत्पादन और विक्रय के अनुबंध का सिलसिला भी शुरू हो गया है। मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनियां जैसी जानलेवा बीमारी फैलाने वाले मच्छरों को नियंत्रित करने के लिए डीआरडीई के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार यह विशेष रसायन मादा मच्छर के लार्वा से ही तैयार किया गया है। इस रसायन का नाम सी-21 (अट्रेक्टीसाइड) दिया गया है।
ऐसे हुआ अनुसंधान
मच्छर को नियंत्रित करने की विधि को तैयार करने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान के वैज्ञानिक दस वर्ष से अनुसंधान कर रहे थे। संस्थान के डा. श्री पAकाश व डा. बीडी पाराशर ने मादा मच्छर के लार्वा पर अनुसंधान किया। इसमें डा. एमजे मेंढकी, डा. सचिन टिकार, संश्लेषण विधि के विकास में एमपी कौशिक, व डा. के गनेशन भी सकिAय रहे।
मादा मच्छर के लार्वा से निकलने वाले तत्व पर अलग-अलग अनुसंधान कर यह परीक्षण किया गया कि मादा मच्छर अण्डे देने के लिए लार्वा के किस तत्व की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। इस अनुसंधान में सी-21 पदार्थ को चिन्हित करते हुए पाया गया कि इस पदार्थ की मौजूदगी में मादा मच्छर अण्डे देने के लिए आकर्षित होती है।
ऐसे होता है सी-21 का उपयोग
कूलर, टब या पानी के अन्य साधनों के पास 400 एमएल पानी में 4 एमएल सी-21 मिला कर रखा जाता है। अधिकांश मादा मच्छर इस पानी में अण्डे देने के लिए आकर्षित होती है। इस पानी में अण्डे विकसित होते ही लार्वा से प्यूपा की अवस्था में ही खत्म हो जाते हैं।
अल्काइल एमाइंस लिमिटेड से अनुबंध
मच्छर को नियंत्रित करने एवं उपस्थिति जानने के लिए डीआरडीई द्वारा दस वर्ष के अनुसंधान के बाद तैयार किए गए अट्रेक्टीसाइड, सी-21 के उत्पादन व विकAय का अनुबंध अल्काइल एमाइंस लिमिटेड मुम्बई के साथ डीआरडीई द्वारा किया गया है। केन्दAीय कीटनाशक बोर्ड द्वारा स्वीकृति मिलते ही सी-21 का उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा। अनेक पAतिष्ठित कम्पनियां डीआरडीई के साथ अनुबंध के लिए कतार में हैं।
विश्व में पहली बार
विश्व में पहली बार भारत के वैज्ञानिकों ने फ्यूरोमोन पर अनुसंधान कर पूरी तरह सुरक्षित अट्रेक्टीसाइड का अविष्कार किया है। भारत ने इसका पेटेंट भी करा लिया है। अमेरिका में भी पीसीटी किया गया है। डीआरडीई के निदेशक डा. आर विजय राघवन कहते हैं कि यह मनुष्य के लिए खतरनाक नहीं हैं, जबकि वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे कॉइल व रसायनों का अधिक इस्तेमाल खतरनाक हो सकता है।
यहां हुआ परीक्षण
सी-21 का परीक्षण डीआरडीई के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय मलेरिया शोध संस्थान के साथ मिलकर किया। यह परीक्षण दिल्ली, बंगलोर व कोचीन के डेंगू व चिकनगुनिया पAभावित क्षेत्रों में अट्रेक्टीसाइड का वर्ष 2008 में किया गया यह परीक्षण सफल रहा है।










