Saturday, Nov 21st, 2009, 6:54 am [IST]  

danik bhaskarकहीं दुआ-सलाम, कहीं लगाई धोक

भास्कर न्यूज

पाली. निकाय चुनाव के लिए मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही प्रत्याशियों की दिनचर्या भी व्यस्त होती जा रही है। सुबह का नाश्ता, दोपहर का लंच और रात का डिनर मुश्किल से ही प्रत्याशी अपने घर में कर पा रहे हैं। यदि चले भी गए तो मोबाइल की एक घंटी फिर उन्हे घर से वार्ड में जनसंपर्क के लिए खींच ले आती है।



फिर शुरु होता है मान=मनुवार और वादों का सिलसिला। कहीं हरउम्र को गले लगाया जाता है तो कहीं हाथ मिलाकर समर्थन मांगते है। तो कहीं बुजूर्गो के चरणस्पर्श कर जीत की आस लगाई जा रही है।



कांग्रेस प्रत्याशी केवलचंद गुलेच्छा : दिन के 12 बजे टाउन हॉल पहुंचे। करीबन बीस मिनट तक बीजेपी प्रत्याशी के साथ जीत को लेकर चर्चा हुई जिसमें दोनों ने अपनी जीत का दावा किया। वहां से वे सीधे वार्ड नं. 30 के बादशाह का झंड़ा पहुंचे। यहां प्रत्याशी विनोद मोदी के समर्थन में हीरालाल मेवाड़ा के नोहरे में सभा ली।



ध्यान राखजो सा के कथन के साथ समर्थन की अपील की। वे महावीर नगर पहुंचे। एक घर के पास गए तो उसके मालिक उनको अंदर ले गए। काजू, दाख, बादाम की मनुवार के साथ आगे बढ़े। साथ में महिला कांग्रेस की प्रदेश उपाध्यक्ष सुमित्रा जैन भी थी।



ढोल=धमाको से पूरा मोहल्ला गूंज रहा था। केबिन पर बैठी एक चाची के पांव छुए तो उसने जीतने का आशीर्वाद दिया। आडो खोलो सा के उद्बोधन के साथ उन्होंने दो=तीन घरों के दरवाजे भी खुलवाएं। दोपहर 2.10 बजे घर खाना खाने के लिए निकले। फोन आ जाने पर वापस 2.30 बजे जंगीवाड़ा में प्रचार में पहुंच गए। शाम को यहां जनसभा भी ली।



बीजेपी प्रत्याशी महेन्द्र बोहरा : दोपहर 2.20 बजे विधायक ज्ञानचंद पारख, प्रत्याशी महेन्द्र बोहरा, पुराना बस स्टैंड के पास चारणियों के बास में जनसंपर्क में जुटे हुए हैं। एक वृद्धा जमुना बाई के पूछने पर बोहरा ने धोक लगाते हुए कहा कि कमल रे फूल वाले महेन्द्र हूं और आपरोइज बेटो हूं। पीछे की तरफ बने सरकारी क्वार्टर में जाने के लिए दीवार लांघी लेकिन विधायक पारख इस ओर रहकर ही इशारों से वोट मांगते रहे। ज्यों ही रवाना हुए मोहल्ले की चंपा बाई ने आवाज लगाकर रोका और बिजली समस्या गिना दी।



यहां से मालियों का बास व नवलखा मंदिर पर लोगों से दुआ सलाम की। बोहरा के साथ स्थानीय प्रत्याशी भी वोट की विनती कर लेते। झुरों के बास में तो हर मकान के आगे वृद्धा खड़ी, इस कारण आशिर्वाद लेने के लिए बोहरा का सिर झुका ही रहा।

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