Saturday, Nov 21st, 2009, 7:52 am [IST]  

danik bhaskar127 गांवों में पीने का पानी जहरीला

भास्कर संवाददाता

उज्जैन. डेंगू, मलेरिया, वायरल से जूझ रहे जिले में फ्लोराइडयुक्त जहरीले पानी की बीमारियों का जाल भी फैल गया है। जिले के 127 गांवों के लोग जहरीला पानी पी रहे हैं। इससे उनमें घातक बीमारियां फैल रही हैं। अब स्वास्थ्य विभाग इसकी रोकथाम के लिए लामबंद हुआ है। जिले की घट्टिया, तराना, बड़नगर और महिदपुर तहसील के जलस्रोतों में फ्लोराइडयुक्त पानी निकल रहा है। फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से ग्रामीण बीमार हो रहे हैं।



यह जानकारी राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार द्वारा कराए गए सर्वे में सामने आई है। इस आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने जलस्रोतों की पहचान और बीमारों का पता लगाने की मशक्कत शुरू कर दी है। प्राथमिक सर्वे में चिह्न्ति किए गए 127 ग्रामों में तीन फील्ड वर्कर और एक कंसल्टेंट द्वारा जलस्रोतों और बीमारों का सर्वे किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के चुनिंदा डॉक्टरों को फ्लोराइड से हो रही बीमारियों की रोकथाम के लिए हैदराबाद में प्रशिक्षण दिया था।



लाइलाज रोग: फ्लोराइड वाले पानी से लाइलाज बीमारियां होती हैं। बीमारी लग जाने के बाद केवल सावधानी और दवाइयों से उन्हें बढ़ने से रोका जा सकता है। इससे डेंटल फ्लोरोसिस (दांत खराब हो जाना, दांतों पर कालापन आना), स्केलटन फ्लोरोसिस (हड्डियों का दर्द) और नान स्केलटन फ्लोरोसिस (जोड़ों का दर्द, गैस आदि) नामक बीमारियां होती हैं। इनके अब तक 236 मरीजों की पहचान हो चुकी है। डेंटल के सबसे ज्यादा 230, स्केलटन का 1 और नॉन स्केलटन के 5 मरीज हैं।



इलाज: कैल्शियम, मैग्नेशियम और विटामिन सी की टेबलेट्स दी जाती है। मरीज को शुद्ध जल उपलब्ध कराया जाता है।



दो तरह से सर्वे: सर्वे दो तरह से होगा एक बीमारियों के आधार पर तथा दूसरा जलस्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा के आधार पर। इससे इलाज और जलस्रोतों के बारे में फैसला लेने में मदद मिलेगी। सर्वे एक महीने में पूरा हो जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की सेवा ली जा रही है। छह महीने तक विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में आने वाले मरीजों में फ्लोराइड से पीड़ित होने की पहचान कर सकें।



प्रयोगशाला बनेगी: बीमारों के इलाज के लिए प्रयोगशाला बनाई जाएगी। बीमारों को उपचार देने के बाद नजर रखी जाएगी। हर महीने उनकी प्रयोगशाला में जांच होगी। इससे पता चलेगा कि दवाइयों का उन पर असर हो रहा है या नहीं।



जलस्रोत उपलब्ध कराएंगे



प्रभावित ग्रामों में स्वास्थ्य विभाग पंचायत, नगर पंचायत अथवा प्रशासन की मदद से ग्रामीणों को शुद्ध जल के नए स्रोत उपलब्ध कराएगा। दूषित पानी के उपचार का बंदोबस्त भी किया जाएगा।



इनका कहना



फ्लोराइडयुक्तपानी वाले जलस्रोतों की पहचान व बीमारों का सर्वे दिसंबर में हो जाएगा। बीमारों का इलाज और निगाह रखने के लिए नई प्रयोगशाला बनेगी। - डॉ. के.के. अग्रवाल, सीएमओ जिला अस्पताल

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