Saturday, Nov 21st, 2009, 8:22 am [IST]  

danik bhaskarअस्पतालों को बजट पूरा दवा अधूरी

भास्कर न्यूज

जबलपुर. जब से दीनदयाल अंत्योदय उपचार योजना शुरू हुई, तभी से सरकारी अस्पतालों में योजना से अलग गरीब मरीजों की दवाओं की ओर न तो सरकार और न ही प्रबंधन ध्यान दे रहा है। अस्पतालों में अब ऐसी स्थिति है कि गरीब मरीजों की दवा के लिए बजट तो पूरा मिल रहा है, पर दवाएं पीड़ितों को अधूरी ही मिल पाती हैं।



कभी ऐसा नहीं होता है कि विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा लिखी दवाएं पूरी मिल पाएं। कोई न कोई दवा की कमी बनी ही रहती है। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल हों या फिर जिला अस्पताल सभी जगह एक-सी स्थिति है। मेडिकल अस्पताल में स्थिति यह है कि सरकार ने 2009 के टेंडर के आधार पर दवा खरीदने के प्रबंधन को निर्देश दिये हैं, पर अभी भी दवा की खरीदी नहीं हुई है।



पता नहीं प्रबंधन और उसके अधिकारी किस पशोपेश में हैं। पहले दवा नीति को लेकर उलझी थी अभी निर्णय को लेकर उलझी है। स्टॉक में जो दवाएं हैं वे मरीजों को मिल रही हैं, इसे कोई इनकार नहीं करता है, पर कितनी मिल रही हैं, यही समस्या है। किसी को सात दिन की दवा लिखी गई है तो मिलती है तीन दिन की और 15 दिन की लिखी गई है तो सात दिन की ही मिलेगी।



अस्पताल से जितनी दवा मिलती है तो गरीब मरीज उससे कहीं ज्यादा दवाएं बाहर से खरीदते हैं। विक्टोरिया अस्पताल में भी यही हो रहा है। चिकित्सक कहते हैं कि जो दवाएं हमारे स्टॉक में हैं वे दे रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन के अधिकारी कोई मरीज यदि आवाज उठाये तो यही कहते हैं कि जो हमारे पास है वो दे रहे हैं। शेष दवाएं आगे जल्द आ जायेंगी। मामले के संबंध में मेडिकल अस्पताल अधीक्षक से सम्पर्क का प्रयास किया गया, पर बात नहीं हो सकी।



बहुत कुछ दया पर निर्भर



वार्डो में बहुत कुछ दया पर निर्भर भी रहता है। नर्स या उपलब्ध डॉक्टर का मूड अच्छा है तो दवा कह देगा कि है बाहर से नहीं मंगाना। मन है तो यह भी कह देते हैं कि यहां दवाएं नहीं हैं लिख देते हैं बाहर से ले आयो। अक्सर दवा उपलब्ध भी है तो विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई दवा को बाहर से मंगवा लिया जाता है। एमएलसी प्रकरण में तो टांके के धागे तक देखा गया है कि पीड़ित से ही मंगाये जाते हैं। घाव खुला रहता है और मरीज टांके आने का इंतजार करता रहता है।



दो साल से बढ़ा बजट



मेडिकल या विक्टोरिया सभी अस्पतालों की दवा का बजट बढ़ा दिया गया है। इसके साथ मरीज के खाने का भी बजट अस्पतालों में बढ़ा दिया गया है। इसके एवज में मरीजों को सुविधाएं और दवा की मोहताजी घटने की बजाए बढ़ी ही है। अभी भी दाल पतली ही है और दवा की कमी बरकरार है।



हम पूरी दवा दे रहे



भर्ती मरीज हो या ओपीडी का मरीज हम सभी को पूरी दवाएं दे रहे हैं। दवाओं की कोई भी कमी हमारे पास नहीं है, जो स्टॉक में रहती हैं वो दवाएं मरीज को हर हाल में दी जाती हैं। - डॉ. अजित दुबे, सिविल सर्जन



कमी जैसी कोई स्थिति-मेडिकल में सभी दवाएं मरीज को दी जा रही हैं। मरीज शिकायत जरूर करते हैं, पर सभी का खयाल रखा जा रहा है। कुछ कमी बीच में थी, जिसमें अब काफी सुधार है। - डॉ. अजय शर्मा, उप अधीक्षक मेडिकल

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