अब ‘मुन्नाभाई’ जाएंगे जेल
सागर. व्यावसायिक परीक्षा मंडल ने सागर मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत नौ छात्रों के विरुद्ध पीएमटी परीक्षा अवैध तरीके से उत्तीर्ण करने के मामले में शुक्रवार को भोपाल के एमपी नगर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। इस पूरे मामले को सिर्फ भास्कर ने ही प्रमुखता से उजागर किया था। भोपाल के एडीशनल एसपी चंद्रशेखर सोलंकी ने बताया कि व्यापमं संचालक ने सागर मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे नौ छात्रों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की थी।
जांच के बाद जाहर सिंह, प्रदीप कुमार, भरत सिंह, रौनक जायसवाल, पंकज सिंह, कमलेश, अश्विन जोयस, इंदिरा वारिया, दिलीप के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। श्री सोलंकी ने बताया कि नौ छात्रों ने पीएमटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए परीक्षा फार्म में स्वयं के फोटो न लगाकर किसी अन्य के फोटो लगाए थे। प्रवेश पत्र पर छपे फोटो के आधार पर जिन छात्रों को परीक्षा में शामिल होना था उनके स्थान पर दूसरे उम्मीदवारों ने परीक्षा दी।
उन्होंने बताया कि सागर मेडिकल कॉलेज की हुई काउंसिलिंग में इन छात्रों ने पीएमटी के प्रवेश पत्र में छपी फोटो से छेड़छाड़ कर जिन छात्रों को परीक्षा देनी थी। उनके फोटो चस्पा कर एमबीबीएस में प्रवेश ले लिया। इन फर्जी छात्रों के एमबीबीएस में अवैध तरीके से प्रवेश लेने के मामले का खुलासा काउंसिलिंग में प्रवेश मिलने के बाद तब हुआ, जब कॉलेज रिपोर्ट करने आए छात्रों के फोटो पीएमटी के प्रवेश पत्र में छपे फोटो से नहीं मिला।
कर दिया था इशारा
‘भास्कर’ ने धोखाधड़ी पूर्वक एडमिशन लेने वाले छात्रों के बारे में गत 18 अक्टूबर को कॉलेज में हुई एडमिशन प्रक्रिया में इशारा कर दिया था। उस समय भास्कर ने ‘कहीं वे मुन्ना भाई तो नहीं’ शीर्षक से तीन संदिग्ध छात्रों की खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद कॉलेज के डीन डॉ. एससी तिवारी ने पूरे मामले की जांच व्यापमं के परीक्षा नियंत्रक एसएस भदौरिया से कराई थी।
जिसमें उन्होंने सरसरी तौर पर इन छात्रों द्वारा धोखाधड़ी किए जाने की पुष्टि की थी। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने अन्य 6 छात्रों के दस्तावेज जांच के लिए भेजे। जिसमें वह भी फर्जी पाए गए। इस संबंध में भास्कर ने लगातार खबरें प्रकाशित कर कॉलेज प्रबंधन, चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं व्यापमं का ध्यानाकृष्ट कराया। इसके बाद शुक्रवार को मामला दर्ज किया गया।
जाने कितने छात्रों को हक मारा जाता है
इंदौर मेडिकल कॉलेज के एक पूर्व छात्र के मुताबिक इस तरह के प्रपंच करके फर्जी छात्रों द्वारा एडमिशन लेने से प्रतिवर्ष कई योग्य छात्र एडमिशन नहीं ले पाते हैं। सीधा सा कारण है कि ये लोग धोखाधड़ी से मिले अच्छे नंबरों की दम पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों पर कब्जा कर लेते हैं जबकि दिन-रात की मेहनत के बावजूद थोड़े से कम नंबर के कारण लगनशील छात्र एडमिशन से वंचित रह जाते हैं और आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण वह चाहकर भी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन नहीं ले पाते हैं।
काउंसिलिंग में बारीकी से जांच हो
सागर मेडिकल कॉलेज के एक प्रोफेसर के मुताबिक काउंसिलिंग के समय कतिपय अमले की लापरवाही के कारण हर साल कई फर्जी छात्र मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पा जाते हैं। अगर काउंसिलिंग के समय एडमिशन लेने वाले छात्र के प्रत्येक दस्तावेज की बारीकी से जांच हो तो यह छात्र एडमिशन लेने से पहले ही पकड़े जा सकते हैं। ऐसा करने से कॉलेज की सीट्स भी खाली रहने से बचाई जा सकती हैं।
सागर की फोरेंसिक लैब को अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र
राज्य फोरेंसिंक लैब को एफबीआई द्वारा मनोनीत इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जेनेटिक आइडेंटिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रेनेडा, स्पेन ने थर्ड एशियन एआईसीईएफ डीएनए प्रोफिशिएंसी टेस्ट 2009 का सर्टिफिकेट दिया है। सागर की प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों को यह प्रमाण पत्र जयपुर में हाल में आयोजित फोरेंसिक साइंस नेशनल कांफ्रेंस की पूर्व संध्या पर दिया गया।










