पाकिस्तान: खुलेआम घूम रहा है 26/11 का मास्टरमाइंड
लंदन। पाकिस्तान पर आतंकवादियों पर कार्रवाई करने का भले ही दबाव हो लेकिन वास्तविकता तो यह है कि वह इस बारे में जरा सा भी गंभीर नहीं है। यह बात इसी से साबित होती है कि मुम्बई हमले का मुख्य साजिशकर्ता हाफिज मोहम्मद सईद पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा है।
ब्रिटेन के अखबार 'द टाइम्स' में शनिवार को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पिछले वर्ष 26 नवम्बर को मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले का मुख्य साजिशकर्ता एवं आतंकवादी संगठन लश्करे तैयबा का संस्थापक हाफिज मोहम्मद सईद ने शुक्रवार को लाहौर की सबसे बडी मस्जिद जामिया अल कादसिया में अपने हजारों समर्थकों को संबोधित किया।
सईद ने अपने संबोधन में कहा कि अल्लाह ने वादा किया है कि यदि मुस्लिम सही राह पर चलें तो वह दुनिया की सबसे बडी शक्ति बन सकते हैं। हमारे हुक्मरान अमेरिका के गुलाम हैं उन्होंने कुछ डालरों के बदले अपना विवेक बेच दिया है।
गौरतलब है कि भारत में अमेरिका के राजदूत टिमोथी रोइमर ने इस सप्ताह दिए अपने बयान में मुम्बई हमले के मुख्य साजिशकर्ता सईद और अन्य छह संदिग्धों के खिलाफ अदालत में मामला चलाने की भारत की मांग का समर्थन करते हुए कहा था, हमें पाकिस्तान से इस संबंध में कार्रवाई और उसके परिणाम का इंतजार है।
विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार का सईद के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के पीछे उसकी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई मुख्य कारण है जो उसका समर्थन करती है। आईएसआई कश्मीर में भारतीय सेना के खिलाफ आतंकवादी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए सईद द्वारा स्थापित लश्करे तैयबा का वर्ष 2002 से ही समर्थन कर रही है। अमेरिका से दबाब के कारण पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2002 में लश्कर पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन यह संगठन जमात उद दावा के नये नाम से अभी भी सक्रिय है।
पिछले वर्ष दिसम्बर में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पारित प्रस्ताव में जमात उद दावा को लश्कर का ही एक अंग घोषित कर दिया गया था। इसके कारण पाकिस्तान को जमात उद दावा के सभी सम्पत्तियों को अपने कब्जे में लेने के साथ ही उसके कई सदस्यों को गिरफ्तार करने को मजबूर होना पडा था। हालांकि एक अदालत के इस फैसले के बाद कि गिरफ्तार सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई गैरकानूनी है सरकार को इन्हें कुछ महीने बाद ही रिहा भी करना पडा था।
लाहौर की एक अदालत ने सईद के खिलाफ आतंकवाद निरोधक मामले वापस लेने के साथ ही अपने फैसले में कहा कि जमात उद दावा के आतंकवादी कार्रवाई में लिप्त रहने के संबंध में कोई सबूत नहीं मिले है। इसलिए इस संगठन को बेरोकटोक अपनी गतिविधियां चलाने दिया जाए।










