Monday, Nov 23rd, 2009, 11:58 am [IST]  

danik bhaskarआतंकवादी हमलों की कवरेज में संयम बरते मीडिया

Agency

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन ने मीडिया को आतंकवादी गतिविधियों की कवरेज के दौरान संयम बरतने की सलाह देते हुए शनिवार को कहा कि मीडिया का गैरजिम्मेदराना रवैया समाज के लोगों के बीच नफरत और टकराव का कारण बन सकता है।



न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा कि खबरों के प्रसारण में मीडिया यदि संयम नहीं रखता है तो उससे समाज के विभिन्न वर्गो में टकराव पैदा हो सकता है। उन्होंने मुम्बई हमलों का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवादी हमलों की कवरेज में संयम नहीं बरतने से किसी अनहोनी की आशंका बनी रहती है।



आतंकवाद के मसले पर न्यायविदों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए न्यायमूर्ति बालाकृष्णन ने कहा कि दर्शकों तक समाचार पहले पहुंचाने की जल्दबाजी में मीडिया को अपनी सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए।



उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद ने आम आदमी के जीवन की शांति छिन ली है। आतंकवादी अब बेहतर संचार व्यवस्था और आधुनिक हथियारों से लैस हैं और मानवता को चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर इसका सामना करना होगा।

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विचार:

Bhaskar Sanwal

Saturday, 21st Nov 2009, 19:15
के जी बालकृष्णन साहब आप मीडीया को नसीहत देने की बजाए शिवसेना पर करवाही करिए नही तो आप की नपुंसकता और संवेदनहीनता का परिणाम एक दिन पूरा देश भुगतेगा , आप जैसे बेकार के लोगों की वजह से ही देश के संविधान का चीरहरण होता है और एक गुंडा क़ानून से भी बड़ा बन जाता है ! आप खामोश क्यूँ हैं ? बिक चुके हैं या डरे हुए हैं ????

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